Dhanteras Ke Bhajan In Hindi Lyrics: प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। साल 2026 में त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर की सुबह 10:30 बजे से लेकर 7 नवंबर की सुबह 10:47 बजे तक रहेगी। ऐसे में आज 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को धनतेरस का पर्व मनाया जा रहा है। धनतेरस के दिन शाम के समय धन की देवी मां लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर जी और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। साथ ही आरती और भजन गाए जाते हैं। इस दिन घर के सदस्य इकट्ठा होकर देवी-देवताओं की कृपा, प्रेम, करुणा, समर्पण और भक्ति से जुड़े भजन व गीत गाते हैं। मान्यता है कि धनतेरस के दिन पूजा-पाठ करने से घर में सुख, समृद्धि, शांति और धन आदि का आगमन होता है। यहां पर धनतेरस के टॉप 3 लोकप्रिय भजनों के लिरिक्स दिए गए हैं, जिनको गाने के साथ आप भगवान का गुणगान कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
धनतेरस के भजन हिंदी में
मैया धन देना, मैया सुख देना...
मेरे घर में पधारो लक्ष्मी मैया
मेरे घर में पधारो लक्ष्मी मैया,
सुख समृद्धि बरसाओ लक्ष्मी मैया।
तेरे चरणों में शीश झुकाऊँ,
प्रेम से तेरी ज्योत जलाऊँ।
भक्ति का दीप जलाओ मैया,
मेरे घर में पधारो लक्ष्मी मैया।
धन-धान्य से घर भर देना,
दुख-दरिद्र सब हर लेना।
खुशियों के फूल खिलाओ मैया,
मेरे घर में पधारो लक्ष्मी मैया।
आओ आओ जी कुबेर जी आओ...
हमारे घर की शोभा बढ़ाओ,
आओ आओ जी कुबेर जी आओ।
हमारे घर की शोभा बढ़ाओ,
आओ आओ जी कुबेर जी आओ॥
अलकापुरी से आओ महाराजा,
अलकापुरी से आओ महाराजा।
आके धन वर्षा कर जाओ,
आओ आओ जी कुबेर जी आओ॥
हमारे घर की शोभा बढ़ाओ,
आओ आओ जी कुबेर जी आओ॥
सोने की नगरी वाले मेरे बाबा,
सोने की नगरी वाले मेरे बाबा।
कभी निर्धन के घर चले आओ,
आओ आओ जी कुबेर जी आओ॥
हमारे घर की शोभा बढ़ाओ,
आओ आओ जी कुबेर जी आओ॥
हम बैठे हैं कब से स्वागत में,
हम बैठे हैं कब से स्वागत में।
अब और ना देर लगाओ,
आओ आओ जी कुबेर जी आओ॥
हमारे घर की शोभा बढ़ाओ,
आओ आओ जी कुबेर जी आओ॥
हम छप्पन भोग सजाए बैठे,
हम छप्पन भोग सजाए बैठे।
बाबा आके भोग लगाओ,
आओ आओ जी कुबेर जी आओ॥
हमारे घर की शोभा बढ़ाओ,
आओ आओ जी कुबेर जी आओ॥
आओ आओ जी कुबेर जी आओ,
हमारे घर की शोभा बढ़ाओ।
धन-धान्य और खुशियाँ बरसाओ,
आओ आओ जी कुबेर जी आओ॥
बोलो कुबेर महाराज की जय!
जय श्री कुबेर देव!
जय धन्वंतरि देवा...
जय धन्वंतरि देवा, जय धन्वंतरि देवा,
रोग-दोष सब हर लो, प्रभु कर दो सेवा॥
अमृत कलश हाथों में, शोभा अति प्यारी,
दीन-दुखी के तुम हो, प्रभु पालनहारी॥
आरोग्य का वर देना, सुख-शांति देना,
सबके जीवन में प्रभु, खुशहाली भर देना॥
धन्वंतरि भगवान की जय!
