Krishna Janmashtami, Lord Krishna 108 Names in Hindi: भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित जन्माष्टमी का पर्व भक्तों के लिए बेहद विशेष माना जाता है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करते हैं और रात में निशीथ काल में बाल गोपाल के जन्म का उत्सव मनाते हैं। मंदिरों से लेकर घरों तक कृष्ण जन्मोत्सव की विशेष तैयारियां की जाती हैं। सनातन परंपरा में भगवान के नामों के स्मरण और जाप को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और भक्तिभाव से भगवान श्रीकृष्ण के नामों का जाप करने से मन को शांति मिलती है और भक्त का ध्यान भगवान की भक्ति में केंद्रित होता है। जन्माष्टमी के अवसर पर श्रीकृष्ण के 108 नामों का स्मरण करना भी विशेष फलदायी माना जाता है।
भगवान श्रीकृष्ण के 108 नाम उनके व्यक्तित्व, बाल लीलाओं, पराक्रम, स्वरूप और विभिन्न दिव्य गुणों को दर्शाते हैं। कहीं वे यशोदा के लाड़ले कन्हैया हैं तो कहीं गोवर्धन उठाने वाले गिरधारी, कहीं भक्तों के रक्षक हैं तो कहीं अर्जुन के सारथी। आइए जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2026) के इस पावन अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के 108 नामों का स्मरण करें।
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भगवान श्री कृष्ण के 108 नाम - Lord Krishna 108 Names
1. कृष्ण
2. कमलनाथ
3. वासुदेव
4. सनातन
5. वसुदेवात्मज
6. पुण्य
7. लीलामानुष विग्रह
8. श्रीवत्स कौस्तुभधराय
9. यशोदावत्सल
10. हरि
11. चतुर्भुजात्त चक्रासिगदा
12. सङ्खाम्बुजा युदायुजाय
13. देवाकीनन्दन
14. श्रीशाय
15. नन्दगोप प्रियात्मज
16. यमुनावेगा संहार
17. बलभद्र प्रियनुज
18. पूतना जीवित हर
19. शकटासुर भञ्जन
20. नन्दव्रज जनानन्दिन
21. सच्चिदानन्दविग्रह
22. नवनीत विलिप्ताङ्ग
23. नवनीतनटन
24. मुचुकुन्द प्रसादक
25. षोडशस्त्री सहस्रेश
26. त्रिभङ्गी
27. मधुराकृत
28. शुकवागमृताब्दीन्दवे
29. गोविन्द
30. योगीपति
31. वत्सवाटि चराय
32. अनन्त
33. धेनुकासुरभञ्जनाय
34. तृणी-कृत-तृणावर्ताय
35. यमलार्जुन भञ्जन
36. उत्तलोत्तालभेत्रे
37. तमाल श्यामल कृता
38. गोप गोपीश्वर
39. योगी
40. कोटिसूर्य समप्रभा
41. इलापति
42. परंज्योतिष
43. यादवेंद्र
44. यदूद्वहाय
45. वनमालिने
46. पीतवससे
47. पारिजातापहारकाय
48. गोवर्थनाचलोद्धर्त्रे
49. गोपाल
50. सर्वपालकाय
51. अजाय
52. निरञ्जन
53. कामजनक
54. कञ्जलोचनाय
55. मधुघ्ने
56. मथुरानाथ
57. द्वारकानायक
58. बलि
59. बृन्दावनान्त सञ्चारिणे
60. तुलसीदाम भूषनाय
61. स्यमन्तकमणेर्हर्त्रे
62. नरनारयणात्मकाय
63. कुब्जा कृष्णाम्बरधराय
64. मायिने
65. परमपुरुष
66. मुष्टिकासुर चाणूर मल्लयुद्ध विशारदाय
67. संसारवैरी
68. कंसारिर
69. मुरारी
70. नाराकान्तक
71. अनादि ब्रह्मचारिक
72. कृष्णाव्यसन कर्शक
73. शिशुपालशिरश्छेत्त
74. दुर्यॊधनकुलान्तकृत
75. विदुराक्रूर वरद
76. विश्वरूपप्रदर्शक
77. सत्यवाचॆ
78. सत्य सङ्कल्प
79. सत्यभामारता
80. जयी
81. सुभद्रा पूर्वज
82. विष्णु
83. भीष्ममुक्ति प्रदायक
84. जगद्गुरू
85. जगन्नाथ
86. वॆणुनाद विशारद
87. वृषभासुर विध्वंसि
88. बाणासुर करान्तकृत
89. युधिष्ठिर प्रतिष्ठात्रे
90. बर्हिबर्हावतंसक
91. पार्थसारथी
92. अव्यक्त
93. गीतामृत महोदधी
94. कालीयफणिमाणिक्य रञ्जित श्रीपदाम्बुज
95. दामोदर
96. यज्ञभोक्त
97. दानवेन्द्र विनाशक
98. नारायण
99. परब्रह्म
100. पन्नगाशन वाहन
101. जलक्रीडा समासक्त गोपीवस्त्रापहाराक
102. पुण्य श्लॊक
103. तीर्थकरा
104. वेदवेद्या
105. दयानिधि
106. सर्वभूतात्मका
107. सर्वग्रहरुपी
108. परात्पराय
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जन्माष्टमी पर क्यों करें श्रीकृष्ण का नाम जाप
भगवान श्रीकृष्ण के ये 108 नाम उनके अलग-अलग स्वरूपों और लीलाओं की झलक प्रस्तुत करते हैं। जन्माष्टमी की रात भगवान के जन्मोत्सव के समय भक्त जब इन नामों का श्रद्धापूर्वक जाप करते हैं, तो वातावरण भक्तिमय हो उठता है। नाम-स्मरण के दौरान मन को एकाग्र रखने और भगवान के स्वरूप का ध्यान करने से आध्यात्मिक शांति का अनुभव भी किया जा सकता है।
जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि उनके जीवन और शिक्षाओं को स्मरण करने का अवसर भी है। इसलिए इस दिन पूजा, व्रत और भजन के साथ श्रीकृष्ण के 108 नामों का पाठ करके भक्त अपने आराध्य के प्रति श्रद्धा व्यक्त कर सकते हैं।
