Ahoi Ashtami 2026: माताओं के लिए अहोई अष्टमी का दिन बेहद खास होता है। इस दिन निर्जला व्रत रखा जाता है। साथ ही माता पार्वती के स्वरूप अहोई देवी की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान साहूकार और उसके 7 पुत्रों की कथा पढ़ने का भी विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई अष्टमी के दिन तप-त्याग करने से बच्चों की लंबी उम्र, सफलता और अच्छी सेहत का आशीर्वाद मिलता है। पंचांग के अनुसार, अहोई अष्टमी की पूजा हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को की जाती है। साल 2026 में 1 नवंबर की दोपहर 02:51 बजे से लेकर 2 नवंबर की दोपहर 01:10 बजे तक कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि रहेगी। ऐसे में आज 1 नवंबर 2026, रविवार को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जा रहा है। यहां पर आप अहोई अष्टमी की पूजा के शुभ मुहूर्त, विधि, मंत्र, आरती और तारों को अर्घ्य देने के समय के बारे में जानेंगे।
अहोई अष्टमी का व्रत कब से कब तक चलता है?
अहोई अष्टमी व्रत का आरंभ सूर्योदय के साथ होता है, जबकि समापन रात में तारों की पूजा करने के बाद होता है। आज सूर्योदय सुबह 06:46 बजे होगा, जबकि शाम 06:07 बजे के आसपास तारों के दर्शन होंगे। बता दें कि चन्द्रोदय आज रात 11:44 बजे होगा।
अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त
अहोई अष्टमी की मुख्य पूजा शाम में की जाती है। आज 1 नवंबर 2026 को अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05:41 बजे से लेकर शाम 07 बजे तक है।
अहोई अष्टमी की पूजा विधि
सुबह की तैयारी और संकल्प
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- घर के मंदिर को गंगाजल से शुद्ध करें और हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें।
शाम की पूजा की तैयारी
- शाम को शुभ मुहूर्त से पहले घर के मंदिर में एक लकड़ी की चौकी रखें।
- चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं।
- चौकी पर अहोई माता का चित्र या कैलेंडर स्थापित करें।
- माता के चित्र के सामने गेहूं और चावल रखें। इनके ऊपर घी का दीपक रखें।
- मिट्टी के 2 छोटे घड़े लें। एक घड़े को जल से और दूसरे को गेहूं से भरें।
- रोली, हल्दी, अक्षत, मौली, पुष्प, फूलों की माला, धूप, मीठे पुए (गुलगुले), हलवा, पूरी, सिंघाड़ा, शकरकंद और फल पूजा सामग्री को अलग करके रख लें।
पूजन विधि
- अहोई माता के चित्र के सामने एक आसन पर बैठें।
- भगवान गणेश, माता पार्वती, शिव जी और अहोई माता का स्मरण करें।
- अहोई माता के चित्र और उसके आसपास गंगाजल के छींटे मारें।
- माता अहोई का हल्दी, रोली और अक्षत से तिलक करें।
- देवी को मौली अर्पित करें।
- घर के सभी सदस्यों का तिलक करें और उनके हाथ में मौली बांधे।
- माता अहोई को पुष्प और फूलों की माला अर्पित करें।
- घी का दीपक जलाएं।
- अहोई माता को फल, मीठे पुए, हलवा, पूरी, सिंघाड़ा और शकरकंद आदि भोग अर्पित करें। इस दौरान मंत्रों का लगातार जाप करते रहें।
- हाथ में गेहूं और जल लेकर अहोई अष्टमी की व्रत कथा पढ़ें।
- कथा पूरी होने के बाद गेहूं और जल माता को अर्पित करें।
- अहोई माता की आरती करके पूजा का समापन करें।
तारों को अर्घ्य और व्रत का पारण
- तारे निकलने के बाद करवा से तारों को जल अर्पित करें।
- अब अपने बच्चों की लंबी उम्र की प्रार्थना करें और उनके हाथों से जल ग्रहण कर अपना व्रत खोलें।
अहोई अष्टमी के मंत्र
- ॐ उमादेव्यै नमः
- ॐ पार्वतीप्रिय-नंदनाय नमः
- अहोई माता नमः, अहोई माता नमः। संतान रक्षा करो माता, दीर्घायु और सुख दो माता॥
- नमो नमस्ते मातायै, शिवायै सततं नमः। आराध्यः प्रदात्री च, पुत्राणां सततम् सुलभम्। पूतना को हरै जो, बालकों की रक्षा करै। माता अहोई नमस्तुभ्यं, मम पुत्रां रक्ष सर्वदा॥
अहोई माता की आरती
जय अहोई माता, जय अहोई माता।
तुमको निसदिन ध्यावत, हरि विष्णु विधाता॥
ॐ जय अहोई माता॥
ब्रह्माणी, रुद्राणी, कमला, तू ही है जगमाता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ॐ जय अहोई माता॥
माता रूप निरंजन, सुख-सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, नित मंगल पाता॥
ॐ जय अहोई माता॥
तू ही पाताल बसंती, तू ही है शुभदाता।
कर्म-प्रभाव प्रकाशक, जगनिधि से त्राता॥
ॐ जय अहोई माता॥
जिस घर थारो वासा, वाहि में गुण आता।
कर न सके सोई कर ले, मन नहीं घबराता॥
ॐ जय अहोई माता॥
तुम बिन सुख न होवे, न कोई पुत्र पाता।
खान-पान का वैभव, तुम बिन नहीं आता॥
ॐ जय अहोई माता॥
शुभ गुण सुंदर युक्ता, क्षीर निधि जाता।
रतन चतुर्दश तोकू, कोई नहीं पाता॥
ॐ जय अहोई माता॥
श्री अहोई मां की आरती, जो कोई गाता।
उर उमंग अति उपजे, पाप उतर जाता ॥
ॐ जय अहोई माता, मैया जय अहोई माता।
