Ahoi Ashtami 2026 Date & Time (ahoi ashtami puja samagri list in hindi): प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। ये व्रत माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, खुशहाल जीवन और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखती हैं। इस दिन माता पार्वती के स्वरूप अहोई माता की पूजा की जाती है। साथ ही साही (स्याहु) और उनके 7 पुत्रों का पूजन करने का विधान है। सूर्योदय के साथ ही अहोई अष्टमी का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है, जो शाम को तारों को अर्घ्य देने के बाद समाप्त होता है।
अहोई अष्टमी की पूजा में विभिन्न चीजों की जरूरत होती है। यदि पूजा में एक भी जरूरी चीज शामिल नहीं होती है तो पूजन को अधूरा माना जाता है। आज यहां पर आप अहोई अष्टमी की पूजा में शामिल होने वाली सभी जरूरी चीजों के बारे में जानेंगे।
अहोई अष्टमी की पूजा सामग्री
- माता अहोई का चित्र या कैलेंडर
- एक लकड़ी की चौकी
- लाल रंग का वस्त्र
- अहोई माता की कथा की पुस्तक
- गले में धारण करने के लिए चांदी की अहोई
- गेहूं
- जल से भरा मिट्टी का कलश
- करवा और करवे का ढक्कन
- आम या अशोक के पत्ते
- कलावा
- गाय का घी
- दीपक
- रुई की बत्ती
- धूपबत्ती या अगरबत्ती
- गाय का दूध
- सूखा आटा
- रोली
- अक्षत
- फूल
- फूलों की माला
- मिठाई
- दीवार रंगने के लिए खड़िया (गेरू या चावल का पीसा हुआ घोल)
- हलवा
- पूरी
- पुआ या मीठे पकवान
- मालपुए
- फल (मौसम के अनुसार)
- पैसे
- श्रृंगार का सामान
- सासु मां के लिए वस्त्र या सुहाग की सामग्री
- आरती की थाली
अहोई अष्टमी 2026 की तिथि
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार 1 नवंबर 2026 को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट पर कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ हो रहा है, जबकि समापन अगले दिन 2 नवंबर को दोपहर 01 बजकर 10 मिनट पर होगा। ऐसे में 1 नवंबर 2026, रविवार को अहोई अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा।
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अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त
अहोई अष्टमी की संध्या पूजा शाम 05 बजकर 41 मिनट से शाम 07 बजे के बीच की जाएगी। 1 नवंबर को चन्द्रोदय रात 11 बजकर 44 मिनट पर होगा, जबकि सूर्योदय सुबह 06 बजकर 46 मिनट पर होने वाला है। अहोई अष्टमी की शाम 6 बजकर 7 मिनट के बाद आसमान में तारे नजर आने शुरू हो जाएंगे, जिसके पश्चात व्रत का पारण किया जा सकता है।
