Bahula Chaturthi 2026 Today: बहुला चतुर्थी का पर्व बहुत ही खास होता है, जो विशेषतौर पर गुजरात में मनाया जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को बहुला चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है, जिसे देश के अन्य राज्यों में बोल चौथ और हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान गणेश के हेरम्ब स्वरूप, कृष्ण जी, गाय और बछड़ों की विशेष रूप से पूजा की जाती है। साथ ही व्रत रखने का विधान है। मान्यता है कि बहुला चतुर्थी के दिन तप-त्याग करने से परिवार में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। साथ ही संतान की सेहत और उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद मिलता है। चलिए अब जानें बहुला चतुर्थी की पूजा का आज शुभ मुहूर्त क्या है और व्रत का पारण किस समय किया जाएगा।
बहुला चतुर्थी 2026 की तिथि
- भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी तिथि का आरंभ- 31 अगस्त 2026 को सुबह 08:50 बजे
- भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी तिथि का समापन- 01 सितंबर 2026 को सुबह 07:41 बजे
बहुला चतुर्थी 2026 की पूजा का शुभ मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बहुला चतुर्थी की पूजा शाम में गोधूलि मुहूर्त में करनी चाहिए। आज गोधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 31 मिनट से लेकर शाम 06 बजकर 57 मिनट तक है, लेकिन व्रत का संकल्प सुबह ब्रह्म मुहूर्त में ही लेना शुभ होता है। आज ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 29 मिनट से लेकर सुबह 05 बजकर 14 मिनट तक था।
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बहुला चतुर्थी की पूजा विधि
- सुबह स्नान कर साफ वस्त्र पहनें।
- हाथ में जल व अक्षत लेकर पूजा और व्रत का संकल्प लें।
- शाम में घर के मंदिर में एक चौकी पर पीला या लाल वस्त्र बिछाएं, जिस पर गणेश जी, कृष्ण जी और गौ माता-बछड़े की प्रतिमा स्थापित करें।
- प्रतिमाओं का जल से शुद्धिकरण करें और उनका रोली या चंदन से तिलक करें।
- गणेश जी को दूर्वा, कृष्ण जी को तुलसी दल और गाय-बछड़े को हरा चारा अर्पित करें। साथ ही मिठाई का भोग लगाएं।
- बहुला चतुर्थी पर जपे जाने वाले मंत्रों का जाप करें और कथा पढ़ें।
- घी का दीपक जलाने के बाद अलग-अलग सभी की आरती करें।
- गाय और बछड़े को हरा चारा खिलाएं।
- रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।
बहुला चतुर्थी 2026 का व्रत किस समय खोलें?
आज 31 अगस्त 2026 को चन्द्रोदय रात 08 बजकर 29 मिनट पर होगा, जिसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर आप बहुला चतुर्थी व्रत का पारण कर सकते हैं। अर्घ्य देने के लिए एक तांबे का लोटा लें, जिसमें जल, दूध, रोली, अक्षत और फूल डालें।
