Yam Deepak Timing 2026 Today: धनतेरस के साथ ही दिवाली के 5 दिवसीय महापर्व की शुरुआत हो गई है। देशभर में कल 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को धनतेरस का पर्व मनाया गया, जिसके बाद आज 7 नवंबर को छोटी दिवाली मनाई जा रही है। छोटी दिवाली के दिन लक्ष्मी जी और गणेश जी की पूजा की जाती है। साथ ही शाम के समय यम यानी यमराज के नाम का दीपक जलाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस घर में छोटी दिवाली के दिन यमराज के नाम का दीपक जलता है, वहां अकाल मृत्यु नहीं होती है। परिवार वालों की रक्षा खुद यमराज करते हैं, जिन्हें मृत्यु का देवता माना जाता है। साथ ही घर वालों के पाप नष्ट होते हैं और उनके जीवन में सुख, समृद्धि, शांति, वैभव और धन का स्थायी वास होता है।
हालांकि, यम का दीपक जलाते समय कई नियमों का पालन करना होता है, अन्यथा घर वालों को पाप लग सकता है। आज यहां पर आप यम दीपक जलाने के समय से लेकर नियमों तक के बारे में विस्तार से जानेंगे।
आज यम दीपक जलाने का समय क्या है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को छोटी दिवाली का महापर्व मनाया जाता है। साल 2026 में चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर की सुबह 10:47 बजे से लेकर 8 नवंबर की सुबह 11:27 बजे तक रहेगी। ऐसे में छोटी दिवाली का पर्व आज 7 नवंबर 2026, शनिवार को मनाया जा रहा है। आज चन्द्रोदय शाम 05:45 बजे होगा। भक्तजन आज यम का दीपक शाम 5:37 बजे से रात 8:10 बजे के बीच कभी भी जला सकते हैं।
यम दीपक जलाने के लिए आवश्यक सामग्री
- आटे या मिट्टी का चौमुखा (चार मुख वाला) दीपक
- सरसों का तेल या तिल का तेल
- रुई की चार बत्तियां
- अक्षत/गेहूं/काले तिल
- रोली
- चंदन
- फूल
- खील-बताशे
- एक रुपये का सिक्का
- कौड़ी
यम दीपक जलाने की विधि
- जहां दीपक जलाना है, उस स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
- पवित्र जगह पर अक्षत, गेहूं या काले तिल की ढेरी बनाएं।
- ढेरी पर दीपक रखें, जिसमें तेल भरें और बत्तियां लगाएं।
- दीपक में एक रुपये का सिक्का और कौड़ी डालें।
- दीपक पर रोली, चंदन, अक्षत, फूल और खील-बताशे अर्पित करें। इस दौरान 'मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह। त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥' मंत्र का 11 बार जाप करें।
- यमराज का स्मरण करें और अपने परिवार के सदस्यों की लंबी आयु एवं अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें।
यम दीपक जलाने के मुख्य नियम
यम का दीपक संध्या के समय घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा में जलाएं, जिसे सीधे जमीन पर न रखें। दीपक उसी समय जलाएं, जब परिवार के सभी सदस्य घर में मौजूद हों। दीपक जलाने के बाद उसे पलटकर या बार-बार मुड़कर न देखें।
