व्रत त्योहार

दशहरा 2026: शमी पूजन का महत्व और क्यों बांटे जाते हैं शमी के पत्ते, जानें पौराणिक कथा

दशहरा 2026 में 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन शमी के पेड़ की पूजा और पत्तों को सोने के समान मानकर बांटने की परंपरा है। जानिए इसके पीछे की पौराणिक कथा और महत्व।

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दशहरा 2026: शमी पूजन का महत्व और क्यों बांटे जाते हैं शमी के पत्ते, जानें पौराणिक कथा

इस वर्ष विजयदशमी यानी दशहरा का पावन पर्व 20 अक्टूबर 2026 को पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में दशहरे के दिन शस्त्र पूजा के साथ-साथ शमी के वृक्ष की पूजा का विशेष विधान है। मान्यता है कि इस दिन शमी के पत्तों को भेंट करना सुख, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। कई क्षेत्रों में लोग एक-दूसरे को शमी के पत्ते देकर खुशहाली की कामना करते हैं। दशहरे के दिन शमी के पत्तों को प्रतीकात्मक रूप से 'सोना' मानकर अपनों को दिया जाता है। यह परंपरा धन-संपन्नता और मंगल कामना की अभिव्यक्ति है। हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि महाराष्ट्र जैसे कुछ क्षेत्रों में 'आपटा' के पत्ते बांटे जाते हैं, लेकिन धार्मिक दृष्टि से शमी और आपटा के वृक्ष अलग-अलग हैं। अतः क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार ही इनका महत्व समझा जाना चाहिए।

शमी के पत्तों को सोने के समान मानने के पीछे की कथा

शमी के पत्तों को सोने के समान मानने के पीछे एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार, ऋषि कौत्स अपने गुरु को दक्षिणा देने के लिए राजा रघु के पास पहुंचे थे। राजा रघु ने उनकी सहायता का वचन तो दिया, लेकिन उनके खजाने में पर्याप्त स्वर्ण मुद्राएं नहीं थीं। तब राजा ने कुबेर का आह्वान किया और उनसे स्वर्ण मुद्राओं की वर्षा करने का आग्रह किया। मान्यता है कि कुबेर ने शमी के वृक्ष पर सोने के सिक्कों की वर्षा की थी। जिस दिन यह घटना हुई, वह विजयदशमी का ही दिन था, इसलिए शमी को स्वर्ण के समान शुभ माना जाता है।

महाभारत काल और शमी वृक्ष का संबंध

शमी के वृक्ष का महत्व महाभारत काल से भी जुड़ा हुआ है। लोक मान्यताओं के अनुसार, पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्र इसी शमी के पेड़ पर छिपाए थे। अज्ञातवास की अवधि पूरी होने पर अर्जुन ने शमी वृक्ष से ही अपने अस्त्र-शस्त्र वापस प्राप्त किए थे। इसी कारण से शमी के पेड़ को साहस, शक्ति, कर्तव्य और विजय का प्रतीक माना जाता है।

दशहरे के दिन शमी पूजन का उद्देश्य जीवन में सफलता, साहस और शुभ कार्यों में उन्नति की कामना करना है। भक्त इस दिन शमी के वृक्ष पर पत्ते अर्पित करते हैं, बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं और परिचितों को शमी के पत्ते भेंट करते हैं। यह परंपरा धन प्राप्ति से अधिक धार्मिक आस्था और आपसी प्रेम का प्रतीक है। विजयदशमी का यह पर्व अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश देता है और शमी पूजन इस उत्सव की सकारात्मकता को और अधिक बढ़ा देता है।