Jyeshtha Gauri Festival 2026: महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में हर साल बहुत ही धूमधाम से ज्येष्ठ गौरी का पर्व मनाया जाता है, जिसका जश्न तीन दिनों तक चलता है। इन 3 दिनों में माता पार्वती के देवी गौरी स्वरूप और उनके रूप में महालक्ष्मी की पूजा की जाती है। कई स्थानों पर मां गौरी को गणेश जी की बहन के रूप में ज्येष्ठ और कनिष्ठ के 2 स्वरूपों में पूजा जाता है। साथ ही व्रत रखने और दान करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ गौरी की पूजा और व्रत रखने से विवाहित महिलाओं के घर में सुख-शांति का वास होता है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। वहीं, कुंवारी कन्याओं को मनचाहे वर की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार कल 17 सितंबर 2026 से ज्येष्ठ गौरी पर्व का आरंभ हुआ है। आज ज्येष्ठ गौरी पर्व का दूसरा दिन है, जिसे ज्येष्ठ गौरी पूजा के नाम से जाना जाता है। वहीं, ज्येष्ठ गौरी पर्व का तीसरा व आखिरी दिन कल 19 सितंबर 2026 को है। आज यहां पर आप इन 3 दिनों के महत्व और शुभ मुहूर्त के बारे में जानेंगे।
ज्येष्ठ गौरी पूजा के 3 दिनों का महत्व
प्रथम दिन- मां गौरी का आवाहन
ज्येष्ठ गौरी पूजा के पहले दिन माता गौरी की मूर्ति को घर में अत्यंत आदर और गाजे-बाजे के साथ लाया जाता है। मूर्ति की स्थापना करने के बाद पूजा होती है और तीन दिनों के व्रत का संकल्प लिया जाता है।
द्वितीय दिन- मां गौरी की पूजा
इस दिन मां गौरी का सोलह श्रृंगार कर उनकी विशेष रूप से पूजा की जाती है। साथ ही उन्हें पुरणपोली और कढ़ी-चावल जैसे पारंपरिक व्यंजनों का भोग लगाया जाता है।
तृतीय दिन- मां गौरी की मूर्ति का विसर्जन
तीसरे व आखिरी दिन मां गौरी की पूजा करने के बाद मूर्ति का विसर्जन होता है। साथ ही अगले वर्ष पुनः मां गौरी से आने के लिए प्रार्थना की जाती है।
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ज्येष्ठ गौरी पूजा का शुभ मुहूर्त
17 सितंबर 2026-
ज्येष्ठ गौरी आवाहन मुहूर्त- सुबह 06 बजकर 07 मिनट से लेकर शाम 06 बजकर 24 मिनट तक
18 सितंबर 2026-
ज्येष्ठ गौरी पूजा मुहूर्त- सुबह 06 बजकर 07 मिनट से लेकर शाम 06 बजकर 23 मिनट तक
19 सितंबर 2026-
ज्येष्ठ गौरी विसर्जन मुहूर्त- सुबह 06 बजकर 08 मिनट से लेकर शाम 06 बजकर 22 मिनट तक
तीसरे व आखिरी दिन मां गौरी की मूर्ति का विसर्जन करने के बाद ज्येष्ठ गौरी पर्व के व्रत का पारण किया जाता है।
