Jai Ambe Gauri Ki Aarti Lyrics In Hindi: मां गौरी को समर्पित ज्येष्ठ गौरी उत्सव चल रहा है। आज 18 सितंबर 2026, शुक्रवार को ज्येष्ठ गौरी उत्सव का दूसरा दिन है। कल 17 सितंबर को ज्येष्ठ गौरी उत्सव का पहला दिन था, जबकि कल 19 सितंबर को ज्येष्ठ गौरी उत्सव का आखिरी व तीसरा दिन है। इन 3 दिनों में माता पार्वती के स्वरूप मां गौरी और उनके स्वरूप महालक्ष्मी की पूजा करने का विधान है। साथ ही व्रत रखना शुभ होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां गौरी की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। साथ ही खराब सेहत और वैवाहिक जीवन में चल रही परेशानियों का अंत होता है।
यदि आप भी तीन दिवसीय ज्येष्ठ गौरी उत्सव के दौरान मां गौरी की पूजा कर रहे हैं तो अंत में उनकी आरती जरूर करें। पूजा का समापन आरती के साथ करना शुभ होता है। चलिए अब जानें ज्येष्ठ गौरी उत्सव के दौरान की जाने वाली मां गौरी की आरती के लिरिक्स के बारे में।
मां गौरी की आरती (mata ki aarti jai ambe gauri lyrics in hindi)
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिव।। ॐ जय अम्बे गौरी।।
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥। ॐ जय अम्बे गौरी।।
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥ ॐ जय अम्बे गौरी।।
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी।। ॐ जय अम्बे गौरी।।
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती।। ॐ जय अम्बे गौरी।।
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥ ॐ जय अम्बे गौरी।।
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥ ॐ जय अम्बे गौरी।।
ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी।। ॐ जय अम्बे गौरी।।
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू॥ ॐ जय अम्बे गौरी।।
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता॥ ॐ जय अम्बे गौरी।।
भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥ ॐ जय अम्बे गौरी।।
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती।। ॐ जय अम्बे गौरी।।
श्री अंबेजी की आरती, जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपत्ति पावे॥
ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।।
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ज्येष्ठ गौरी उत्सव का महत्व
ज्येष्ठ गौरी पूजा के पहले दिन माता गौरी का आवाहन करके उनकी मूर्ति को घर में अत्यंत आदर और गाजे-बाजे के साथ स्थापित किया जाता है। पूजा और व्रत का संकल्प लेने के बाद देवी गौरी की पूजा की जाती है। दूसरे दिन मां गौरी का सोलह श्रृंगार करने के पश्चात पूजा की जाती है और उन्हें पारंपरिक व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। वहीं, आखिरी दिन पूजा करने के बाद मां गौरी की मूर्ति का विसर्जन और व्रत का समापन होता है।
