नवरात्रि के पावन पर्व पर कन्या पूजन का विशेष महत्व माना गया है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार अष्टमी या नवमी तिथि पर कन्याओं को भोजन कराकर व्रत का पारण करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन नौ कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है, हालांकि यदि नौ कन्याएं न मिल सकें, तो पांच या सात कन्याओं को भी भोजन कराया जा सकता है।
विधि-विधान से की गई पूजा का फल तभी प्राप्त होता है जब सभी आवश्यक सामग्री उपलब्ध हो। कन्या पूजन के दौरान स्वच्छता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखा जाता है। पूजन को पूर्ण करने के लिए कुछ चुनिंदा चीजों का होना अनिवार्य माना गया है, जिससे माता रानी की कृपा परिवार पर बनी रहे।
कन्या पूजन के लिए आवश्यक सामग्री
कन्या पूजन की तैयारी के लिए आपको कुछ विशेष वस्तुओं की आवश्यकता होगी। सबसे पहले कन्याओं के पैर धोने के लिए एक थाली और स्वच्छ जल रखें। उनके पैर पोंछने के लिए साफ वस्त्र और बैठने के लिए आसन का प्रबंध करें। तिलक लगाने के लिए रोली और अक्षत (चावल) के साथ ही कलावा भी पास रखें।पूजन के दौरान कन्याओं को ओढ़ाने के लिए चुनरी, प्रसाद के रूप में फल और नारियल रखें। भोग के लिए सूजी का हलवा, पूड़ी और काले चने तैयार करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, कन्याओं को भेंट देने के लिए अपनी सामर्थ्य अनुसार श्रृंगार की सामग्री जैसे बिंदी, चूड़ियां, कंघी और पढ़ाई-लिखाई का सामान जैसे कॉपी, पेन, पेंसिल आदि शामिल करें। अंत में उन्हें दक्षिणा के रूप में कुछ धन भी भेंट किया जाता है।
विदाई के समय करें ये दो विशेष कार्य
भोजन और उपहार देने के बाद कन्याओं की विदाई के समय दो कार्यों को करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पहली परंपरा के अनुसार, कन्याओं को एक विशेष पोटली भेंट करें। इसमें एक साफ वस्त्र में चावल, सिक्का, दूर्वा (घास), हल्दी की गांठ और एक फूल बांधकर दें। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और मां दुर्गा की कृपा बनी रहती है।दूसरा महत्वपूर्ण कार्य है कन्याओं का आशीर्वाद लेना। जब कन्याएं भोजन कर लें और उन्हें उपहार दे दिए जाएं, तो परिवार के सभी सदस्यों को मिलकर उनके चरण छूने चाहिए और आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। इसके बाद उन्हें घर के मुख्य द्वार तक सम्मानपूर्वक छोड़ने जाना चाहिए। माना जाता है कि इस प्रकार श्रद्धापूर्वक विदाई करने से माता रानी प्रसन्न होती हैं और घर का वातावरण सकारात्मक व खुशनुमा बना रहता है।
