Karwa Chauth Rituals: करवा चौथ का त्योहार पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और साथ निभाने के संकल्प का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को पूजा के दौरान कई परंपराएं निभाई जाती हैं, जिनमें करवा फेरने की रस्म भी शामिल है। इस रस्म में महिलाएं एक-दूसरे को करवा या पूजा की थाली देती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस रस्म में सात बार ही करवा क्यों फेरा जाता है और इसे करते समय क्या बोलना चाहिए?
करवा चौथ पर करवा फेरने की परंपरा क्यों है खास?
करवा फेरने की रस्म का मुख्य भाव एक-दूसरे के सुहाग और वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना करना है। इस दौरान महिलाएं एक साथ बैठती हैं और बारी-बारी से करवा या पूजा की थाली आगे बढ़ाती हैं। इस तरह सभी महिलाएं पूजा में शामिल होती हैं और एक-दूसरे को शुभकामनाएं देती हैं।
उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा समेत कई राज्यों में यह परंपरा प्रचलित है। हालांकि, इसे निभाने का तरीका हर जगह एक जैसा नहीं होता। कुछ जगहों पर मिट्टी के करवे आपस में बदले जाते हैं, जबकि कई परिवारों में पूजा की थाली आगे बढ़ाने का चलन है।
सात बार ही क्यों फेरा जाता है करवा?
करवा चौथ पर सात बार करवा फेरने को हिंदू विवाह के सात फेरों और सात वचनों से जोड़कर देखा जाता है। विवाह के समय पति-पत्नी एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने और हर परिस्थिति में साथ निभाने का संकल्प लेते हैं। इसी तरह करवा चौथ की रस्म भी रिश्ते में प्रेम, विश्वास और समर्पण के भाव को दर्शाती है। धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुसार, सात बार करवा फेरना वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना से जुड़ा है। हालांकि, इस संख्या के पीछे अलग-अलग क्षेत्रों में अलग मान्यताएं भी हो सकती हैं। इसलिए इसे सभी जगहों पर एक समान धार्मिक नियम मानना सही नहीं होगा।
करवा फेरने की रस्म कैसे निभाएं?
इस रस्म के लिए महिलाएं पूजा की जगह पर एक साथ बैठती हैं। सबसे पहले करवा चौथ माता और माता पार्वती सहित परंपरा के अनुसार पूजा की जाती है। इसके बाद महिलाएं करवा या पूजा की थाली एक-दूसरे को देना शुरू करती हैं। आमतौर पर करवा सात बार आगे बढ़ाया जाता है। इस दौरान महिलाएं पारंपरिक गीत गाती हैं और अपने परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। कुछ जगहों पर करवा वापस अपनी जगह पर रखने के बाद व्रत कथा सुनी जाती है, जबकि दूसरी जगहों पर रस्म का क्रम अलग हो सकता है। अपने परिवार में चली आ रही परंपरा के अनुसार इसे निभाया जा सकता है।
करवा फेरते समय क्या बोलती हैं महिलाएं?
करवा फेरने के दौरान कई जगहों पर महिलाएं 'ले सुहागन ले करवा, दे सुहागन दे करवा' जैसे पारंपरिक बोल बोलती हैं। इन शब्दों के जरिए करवा का आदान-प्रदान किया जाता है और एक-दूसरे के सुहाग की मंगलकामना की जाती है। कुछ परिवारों में महिलाएं 'पार्वती माता सुहाग दे, चौथ माता सुहाग दे' जैसे शब्द भी बोलती हैं। इनके माध्यम से माता पार्वती और करवा चौथ माता से सुखी वैवाहिक जीवन, पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की जाती है। अलग-अलग इलाकों में इन बोलों और गीतों में बदलाव देखने को मिल सकता है।
