करवा चौथ का व्रत भारतीय संस्कृति में सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत की पूर्णता के लिए पूजा के दौरान विशेष कथाओं का श्रवण करना आवश्यक माना गया है। इनमें से गणेश जी और नेत्रहीन बुढ़िया की कथा अत्यंत प्रचलित है, जिसे श्रद्धापूर्वक सुना जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय की बात है कि एक नेत्रहीन बुढ़िया थी, जो अत्यंत निर्धन थी। वह प्रतिदिन पूरी श्रद्धा के साथ भगवान गणेश की पूजा-अर्चना किया करती थी। बुढ़िया की भक्ति से प्रसन्न होकर गणेश जी साक्षात उसके सामने प्रकट हुए और उसे अपनी इच्छा अनुसार कोई भी वरदान मांगने को कहा। हालांकि, बुढ़िया को यह समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या मांगे।
बुढ़िया माई की चतुराई और गणेश जी का आशीर्वाद
बुढ़िया ने जब अपने पुत्र और बहू से सलाह ली, तो बेटे ने धन और बहू ने पोता मांगने की बात कही। वहीं, पड़ोसियों ने उसे सलाह दी कि वह अपनी आंखों की रोशनी मांगे ताकि उसका शेष जीवन सुख से बीत सके। बुढ़िया ने इन सभी सुझावों पर विचार किया और एक ऐसी युक्ति सोची जिससे सबका भला हो सके। अगले दिन जब गणेश जी पुनः प्रकट हुए, तो बुढ़िया ने चतुराई से एक साथ कई वरदान मांग लिए।बुढ़िया ने गणेश जी से कहा कि यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं, तो मुझे नौ करोड़ की माया, निरोगी काया, अमर सुहाग, आंखों में प्रकाश, नाती-पोते और संपूर्ण परिवार के लिए सुख प्रदान करें। साथ ही, उसने अंत में मोक्ष की भी कामना की। बुढ़िया की इस चतुराई को देखकर गणेश जी मुस्कुराए और बोले कि तुमने तो मुझे ठग लिया है, लेकिन मेरे वचन के अनुसार तुम्हें यह सब प्राप्त होगा। ऐसा कहकर गणेश जी अंतर्ध्यान हो गए। मान्यता है कि जो भी भक्त करवा चौथ के दिन इस कथा को सुनता है, भगवान गणेश उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
