Shardiya Navratri 2026 Day 6 Today (maa katyayani ki puja vidhi mantra): 11 अक्टूबर से लेकर 19 अक्टूबर 2026 तक शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व चलेगा। इस दौरान भक्तजन मां दुर्गा और उनके 9 स्वरूपों की पूजा करते हैं तथा व्रत रखते हैं। आज 15 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि का छठा दिन है, जो कि मां दुर्गा के छठे स्वरूप देवी कात्यायनी को समर्पित है। यह देवी पार्वती का सर्वाधिक उग्र रूप है, जो कि उन्होंने महिषासुर नामक राक्षस का नाश करने के लिए धारण किया था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी की पूजा करने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन में खुशियों का वास होता है। इसके अलावा जन्म कुंडली में गुरु ग्रह यानी देवगुरु बृहस्पति की स्थिति मजबूत होती है क्योंकि देवी कात्यायनी बृहस्पति ग्रह को प्रतिनिधित्व करती हैं। यदि आपने भी आज व्रत रखा है तो यहां से पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और आरती आदि के बारे में जान सकते हैं।
देवी कात्यायनी का स्वरूप
पौराणिक शास्त्रों में देवी कात्यायनी को विशाल दैवीय सिंह पर 4 भुजाओं के साथ दर्शाया गया है। माता के एक बाएं हाथ में कमल का फूल है, जबकि दूसरे बाएं हाथ में तलवार है। इसके अलावा एक दाहिना हाथ अभय मुद्रा में है, जबकि दूसरा वरद मुद्रा में है।
देवी कात्यायनी की पूजा के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:42 बजे से सुबह 5:32 बजे तक
- प्रातः संध्या: सुबह 5:07 बजे से सुबह 6:22 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:51 बजे से शाम 6:16 बजे तक
- सायाह्न संध्या: शाम 5:51 बजे से शाम 7:06 बजे तक
- अमृत काल: 17 अक्टूबर की सुबह 2:35 बजे से सुबह 4:23 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: रात 11:42 बजे से सुबह 12:32 बजे तक
देवी कात्यायनी की प्रिय चीजें
- प्रिय पुष्प-
- प्रिय फल-
- प्रिय भोग-
- प्रिय रंग-
- प्रिय मंत्र-
- प्रार्थना-
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥
- स्तुति-
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
- ध्यान-
सिंहारूढा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्विनीम्॥
स्वर्णवर्णा आज्ञाचक्र स्थिताम् षष्ठम दुर्गा त्रिनेत्राम्।
वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥
पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रसन्नवदना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम्॥
- स्तोत्र-
स्मेरमुखी शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोऽस्तुते॥
पटाम्बर परिधानां नानालङ्कार भूषिताम्।
सिंहस्थिताम् पद्महस्तां कात्यायनसुते नमोऽस्तुते॥
परमानन्दमयी देवी परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति, कात्यायनसुते नमोऽस्तुते॥
विश्वकर्ती, विश्वभर्ती, विश्वहर्ती, विश्वप्रीता।
विश्वाचिन्ता, विश्वातीता कात्यायनसुते नमोऽस्तुते॥
कां बीजा, कां जपानन्दकां बीज जप तोषिते।
कां कां बीज जपदासक्ताकां कां सन्तुता॥
कांकारहर्षिणीकां धनदाधनमासना।
कां बीज जपकारिणीकां बीज तप मानसा॥
कां कारिणी कां मन्त्रपूजिताकां बीज धारिणी।
कां कीं कूंकै कः ठः छः स्वाहारूपिणी॥
- कवच-
ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी॥
कल्याणी हृदयम् पातु जया भगमालिनी॥
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देवी कात्यायनी की पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठने के पश्चात स्नान आदि कार्य करने के बाद लाल या पीले रंग के कपड़े पहनकर पूजा के लिए तैयार हो जाएं।
- घर के मंदिर में गंगाजल का छिड़काव करें, जिससे वो स्थान शुद्ध हो जाए।
- मंदिर में स्थापित मां दुर्गा की मूर्ति के साथ देवी कात्यायनी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- मां दुर्गा और उनके 9 स्वरूपों का स्मरण करने के पश्चात पूजा और व्रत का संकल्प लें।
- देवी को रोली, अक्षत, वस्त्र, श्रृंगार का सामान, फूल, फल और भोग अर्पित करें। इस दौरान मंत्रों का जाप करते रहें।
- मां कात्यायनी की प्रार्थना, स्तोत्रम्, कवच, चालीसा और ध्यानम् आदि पढ़ें।
- घी का दीपक जलाने के पश्चात नवरात्रि के छठे दिन के व्रत की कथा पढ़ें।
- आरती करके पूजा का समापन करें।
- शाम को फिर से देवी कात्यायनी की पूजा करें, जिसके बाद आप व्रत का पारण कर सकते हैं।
देवी कात्यायनी की आरती
जय जय अम्बे जय कात्यायनी। जय जग माता जग की महारानी॥
बैजनाथ स्थान तुम्हारा। वहावर दाती नाम पुकारा॥
कई नाम है कई धाम है। यह स्थान भी तो सुखधाम है॥
हर मन्दिर में ज्योत तुम्हारी। कही योगेश्वरी महिमा न्यारी॥
हर जगह उत्सव होते रहते। हर मन्दिर में भगत है कहते॥
कात्यायनी रक्षक काया की। ग्रन्थि काटे मोह माया की॥
झूठे मोह से छुडाने वाली। अपना नाम जपाने वाली॥
बृहस्पतिवार को पूजा करिये। ध्यान कात्यानी का धरिये॥
हर संकट को दूर करेगी। भण्डारे भरपूर करेगी॥
जो भी माँ को भक्त पुकारे। कात्यायनी सब कष्ट निवारे॥
