Shardiya Navratri 2026 Today Day 7 (maa kalaratri ki puja vidhi mantra aarti): 11 अक्टूबर 2026 से मां दुर्गा को समर्पित शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है। आज 17 अक्टूबर, शनिवार को नवरात्रि का सातवां दिन है, जो कि मां दुर्गा के सातवें स्वरूप देवी कालरात्रि की पूजा के लिए खास है। देवी कालरात्रि को माता पार्वती का सबसे उग्र व भयंकर रूप माना जाता है, जो उन्होंने शुम्भ एवं निशुम्भ नामक राक्षसों का वध करने के लिए लिया था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी कालरात्रि की पूजा करने से जीवन की तमाम समस्याएं दूर होती हैं और जन्म कुंडली में शनि ग्रह की स्थिति मजबूत होती है। आज यहां पर आप देवी कालरात्रि के स्वरूप से लेकर पूजा विधि के बारे में विस्तार से जानेंगे।
देवी कालरात्रि का स्वरूप
देवी कालरात्रि को 4 भुजाओं के साथ वाहन गधे पर दर्शाया गया है। मां का एक दाहिना हाथ अभय मुद्रा में है, जबकि दूसरा दाहिना हाथ वरद मुद्रा में है। बाएं हाथों की बात करें तो एक हाथ में मां के तलवार है, जबकि दूसरे बाएं हाथ में लोहे का घातक अंकुश सुशोभित है। माता पार्वती का यह रूप यकीनन उग्र है, लेकिन वो अपने भक्तों को अभय एवं वरद मुद्रा द्वारा आशीर्वाद भी प्रदान करती हैं। देश के कई राज्यों में मां कालरात्रि को देवी शुभंकरी, देवी महायोगीश्वरी और देवी महायोगिनी आदि नामों से भी जाना जाता है।
देवी कालरात्रि की पूजा का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय- सुबह 06:23 बजे
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:43 से लेकर सुबह 05:33 बजे तक
- प्रातः सन्ध्या- सुबह 05:08 से लेकर सुबह 06:23 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त- सुबह 11:43 से लेकर दोपहर 12:29 बजे तक
- सायाह्न सन्ध्या- शाम 05:50 से लेकर शाम 07:05 बजे तक
- निशिता मुहूर्त- रात 11:41 से लेकर सुबह 12:32 बजे तक
देवी कालरात्रि की पूजा विधि
- शुभ मुहूर्त से पहले उठकर पूजा के लिए गहरे नीले रंग के कपड़े पहनकर तैयार हो जाएं।
- घर के मंदिर में गंगाजल का छिड़काव कर उसे शुद्ध करें।
- मंदिर में स्थापित मां दुर्गा की मूर्ति के पास लाल कंबल के आसन पर देवी कालरात्रि की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें।
- शनि देव, मां दुर्गा और उनके 9 स्वरूपों का स्मरण करने के बाद पूजा तथा व्रत का संकल्प लें।
- देवी को रोली, अक्षत, फूल, वस्त्र, श्रृंगार का सामान और भोग अर्पित करें।
- पूजा सामग्री अर्पित करते समय मंत्रों का जाप करते रहें।
- घी का दीपक जलाने के पश्चात देवी कालरात्रि की प्रार्थना, स्तोत्र, कवच और स्तुति का पाठ करें।
- नवरात्रि के सातवें दिन की व्रत कथा पढ़ने के बाद आरती करें।
- शाम में फिर से देवी कालरात्रि की पूजा करें, जिसके बाद आप अपने व्रत का पारण कर सकते हैं।
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देवी कालरात्रि की प्रिय चीजें
- प्रिय पुष्प-
- प्रिय रंग-
- प्रिय भोग-
- प्रिय मंत्र-
- प्रार्थना-
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा।
वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
- स्तुति-
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
- ध्यानम्
कालरात्रिम् करालिंका दिव्याम् विद्युतमाला विभूषिताम्॥
दिव्यम् लौहवज्र खड्ग वामोघोर्ध्व कराम्बुजाम्।
अभयम् वरदाम् चैव दक्षिणोध्वाघः पार्णिकाम् मम्॥
महामेघ प्रभाम् श्यामाम् तक्षा चैव गर्दभारूढ़ा।
घोरदंश कारालास्यां पीनोन्नत पयोधराम्॥
सुख पप्रसन्न वदना स्मेरान्न सरोरूहाम्।
एवम् सचियन्तयेत् कालरात्रिम् सर्वकाम् समृध्दिदाम्॥
- स्तोत्र-
कालमाता कलिदर्पध्नी कमदीश कुपान्विता॥
कामबीजजपान्दा कमबीजस्वरूपिणी।
कुमतिघ्नी कुलीनर्तिनाशिनी कुल कामिनी॥
क्लीं ह्रीं श्रीं मन्त्र्वर्णेन कालकण्टकघातिनी।
कृपामयी कृपाधारा कृपापारा कृपागमा॥
- कवच-
ललाटे सततम् पातु तुष्टग्रह निवारिणी॥
रसनाम् पातु कौमारी, भैरवी चक्षुषोर्भम।
कटौ पृष्ठे महेशानी, कर्णोशङ्करभामिनी॥
वर्जितानी तु स्थानाभि यानि च कवचेन हि।
तानि सर्वाणि मे देवीसततंपातु स्तम्भिनी॥
देवी कालरात्रि की आरती
कालरात्रि जय जय महाकाली। काल के मुंह से बचाने वाली॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा। महाचण्डी तेरा अवतारा॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा। महाकाली है तेरा पसारा॥
खड्ग खप्पर रखने वाली। दुष्टों का लहू चखने वाली॥
कलकत्ता स्थान तुम्हारा। सब जगह देखूं तेरा नजारा॥
सभी देवता सब नर-नारी। गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥
रक्तदन्ता और अन्नपूर्णा। कृपा करे तो कोई भी दुःख न॥
न कोई चिन्ता रहे ना बीमारी। ना कोई गम ना संकट भारी॥
उस पर कभी कष्ट न आवे। महाकाली मां जिसे बचावे॥
तू भी भक्त प्रेम से कह। कालरात्रि मां तेरी जय॥
