Shardiya Navratri 2026 2nd day Today (dusre navratri ki katha, मां ब्रह्मचारिणी की कहानी, दूसरे नवरात्र की व्रत कथा): शारदीय नवरात्रि का आरंभ 11 अक्टूबर से हो गया है। आज 12 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है, जिसे मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दूसरे दिन व्रत रखने और मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति मिलती है। साथ ही जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और वैभव का वास होता है। हालांकि, कुछ लोग मंगल दोष से मुक्ति पाने के लिए भी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं क्योंकि मां ब्रह्मचारिणी मंगल ग्रह की नियंत्रक और संचालक हैं।
यदि आप भी आज मां ब्रह्मचारिणी का पूजन करने वाले हैं तो पूजा के दौरान नवरात्रि के दूसरे दिन की कथा जरूर पढ़ें। मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की कथा पढ़ने के बाद ही नवरात्रि के दूसरे दिन की पूजा पूर्ण होती है। चलिए अब जानें शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन पढ़ी जाने वाली मां ब्रह्मचारिणी के व्रत की कथा यानी कहानी के बारे में।
शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन की कथा (dusre navratri ki katha in hindi)
देवी पार्वती ने लिया संकल्प
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में देवी पार्वती का जन्म पर्वतराज हिमालय के घर हुआ था। जैसे-जैसे देवी पार्वती बड़ी हो रही थीं, वैसे-वैसे उनके मन में भगवान शिव के प्रति श्रद्धा बढ़ती जा रही थी। एक दिन देवी ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करने का संकल्प लिया। इस संकल्प को पूरा करने के लिए देवी ने देवर्षि नारद से मार्गदर्शन मांगा।
कई वर्षों तक की कठोर तपस्या
नारद जी ने देवी को सलाह दी कि शिव जी को अपने पति के रूप में पाने के लिए उन्हें कई वर्षों तक कठोर तपस्या करनी होगी। देवी ने बिना देर किए नारद जी की बात मान ली और खुले आकाश के नीचे तपस्या करने के लिए बैठ गई। करीब तीन हजार वर्षों तक देवी ने कड़ी साधना की। तपस्या के शुरुआत में वो केवल टूटे हुए बिल्व पत्र खाया करती थी, जिसके बाद उन्होंने उसे भी छोड़ दिया और निर्जल तपस्या करने लगी।
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देवी ने विभिन्न कठिनाइयों का किया सामना
देवी पार्वती ने अपनी साधना के दौरान विभिन्न कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन एक बार भी उनके मन में अपने संकल्प को तोड़ने का ख्याल नहीं आया। तेज धूप, भारी बारिश, ओले और बदलते मौसम भी उनके दृढ़ निश्चय को तोड़ नहीं पाए। देवी की इस असाधारण तपस्या से उनका शरीर अत्यंत कमजोर हो गया था, लेकिन भगवान शिव के प्रति उनकी श्रद्धा बिल्कुल भी कम नहीं हुई।
सभी देवी-देवताओं ने दिया आशीर्वाद
देवी पार्वती की साधना को देखकर सभी देवी-देवताओं और ऋषि-मुनि प्रभावित हुए, जिसके बाद उन्होंने माता को आशीर्वाद दिया कि उनका संकल्प पूरा होगा। इसके कुछ समय बाद देवी पार्वती के सामने शिव जी प्रकट हुए और उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इस प्रकार देवी पार्वती की तपस्या से शिव जी उन्हें पति के रूप में प्राप्त हुए। बता दें कि इस कठिन तपस्या के कारण ही देवी पार्वती को मां ब्रह्मचारिणी का नाम प्राप्त हुआ था।
