Shardiya Navratri Day 7 2026 Today (maa kalratri vrat katha in hindi, मां कालरात्रि की कहानी क्या है): शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व मां दुर्गा और उनके 9 स्वरूपों को समर्पित है, जो कि कुल 9 दिनों तक मनाया जाता है। साल 2026 में 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि का आरंभ हुआ है, जिसका समापन 9 दिन बाद 19 अक्टूबर को होगा। हालांकि, इस बीच आज 17 अक्टूबर, शनिवार को नवरात्रि के सातवें दिन की पूजा की जाएगी। नवरात्रि का 7वां दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप देवी कालरात्रि को समर्पित है। देवी कालरात्रि की पूजा करने से भय, नकारात्मक ऊर्जा, अकाल मृत्यु के डर, शत्रुओं और जीवन की तमाम बाधाओं से मुक्ति मिलती है। साथ ही शनि ग्रह की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
यदि आप भी आज नवरात्रि के सातवें दिन देवी कालरात्रि की पूजा करने वाले हैं तो यहां से देवी कालरात्रि की व्रत कथा का पाठ कर सकते हैं। मान्यता है कि देवी कालरात्रि की पूजा उन्हें समर्पित कथा पढ़े बिना अधूरी होती है। यहां पर नवरात्रि के सातवें दिन व्रत के दौरान पढ़ी जाने वाली कालरात्रि माता की कथा दी गई है।
मां कालरात्रि की कथा हिंदी में (maa kalratri ki kahani in hindi)
रक्तबीज को प्राप्त था ये वरदान
पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में रक्तबीज नामक एक राक्षस था। रक्तबीज को वरदान प्राप्त था कि जिस भी जगह उसका रक्त गिरेगा, वहां पर उसके जैसा ही एक ओर राक्षस पैदा हो जाएगा। रक्तबीज इस वरदान का खूब लाभ उठाता था। धीरे-धीरे उसने अपने जैसे राक्षसों की फौज खड़ी कर दी और तीनों लोकों पर अपना अधिकार जमाने लगा।
रक्तबीज के आतंक से सभी देवतागण थे परेशान
रक्तबीज राक्षस के आतंक से परेशान होकर सभी देवतागण एक दिन भगवान शिव के पास पहुंचे। शिव जी ने देवताओं को बताया कि रक्तबीज राक्षस का अंत केवल माता पार्वती के हाथों ही हो सकता है। देवताओं की विनती पर शिव जी माता पार्वती के पास गए और उन्हें देवताओं की परेशानी बताई।
मां कालरात्रि ने ऐसे हराया रक्तबीज को
इसके बाद माता पार्वती ने अपनी शक्ति से देवी कालरात्रि का उग्र रूप धारण किया। जब-जब रक्तबीज अपने रक्त को जमीन पर गिराने का प्रयास करता, तब-तब मां कालरात्रि उसे (रक्त) अपने मुख में भर लेती थीं। ऐसे में रक्तबीज को हराना मां कालरात्रि के लिए आसान हो रहा था। हालांकि, लंबे समय तक रक्तबीज राक्षस और देवी कालरात्रि के बीच युद्ध चला, लेकिन अंत में माता रानी की ही जीत हुई।
माना जाता है कि नवरात्रि के सातवें दिन जो भी भक्त मां कालरात्रि की ये कथा पढ़ता है, उसे पूजा का पूर्ण फल मिलता है और जीवन में विभिन्न खुशियों का आगमन होता है।
