भारतीय हस्तरेखा विज्ञान की प्राचीन विधा में केवल हथेली की रेखाओं का ही नहीं, बल्कि शरीर पर मौजूद निशानों का भी विशेष महत्व बताया गया है। शरीर के विभिन्न हिस्सों पर दिखने वाले तिल, मस्से और लहसन (लाल रंग के निशान) को अक्सर व्यक्ति के जीवन, भाग्य और भविष्य से जुड़े संकेतों के रूप में देखा जाता है। मान्यता है कि यदि ये निशान स्पष्ट और आकर्षक हों, तो इनका प्रभाव अधिक सकारात्मक होता है।
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, शरीर पर मौजूद इन निशानों की बनावट और स्थान के आधार पर इनके फल अलग-अलग होते हैं। उदाहरण के लिए, तिल शरीर की त्वचा के साथ समतल होता है, जबकि मस्सा त्वचा से थोड़ा उभरा हुआ होता है। वहीं, लहसन का रंग कुसुंबी या लाल होता है। इन निशानों का आकार और उनकी स्पष्टता ही उनके शुभ या अशुभ होने का मुख्य आधार मानी जाती है।
शरीर के अंगों पर तिल और मस्सों का प्रभाव
हस्तरेखा विज्ञान के जानकारों का मानना है कि माथे पर तिल या मस्सा होना अत्यंत शुभ संकेत है। ऐसी मान्यता है कि जिन व्यक्तियों के माथे पर ये निशान होते हैं, उन्हें समाज में मान-सम्मान के साथ-साथ हर दिशा से लाभ प्राप्त होता है। माथे पर दाहिनी ओर तिल का होना विशेष रूप से धन-संपदा में वृद्धि का सूचक माना गया है। वहीं, बाईं ओर तिल होने पर भी व्यक्ति को अपनी मेहनत का उचित फल मिलता है, हालांकि इसका प्रभाव थोड़ा भिन्न हो सकता है।शरीर के अन्य अंगों पर भी इन निशानों का विशेष अर्थ बताया गया है। यदि किसी व्यक्ति की आंखों पर तिल हो, तो हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, यह करियर में बड़ी सफलता, राजनीति में प्रवेश या उच्च प्रशासनिक पद प्राप्त करने का संकेत हो सकता है। इसी तरह, मुख पर स्पष्ट और आकर्षक तिल का होना व्यक्ति की आर्थिक उन्नति और मेहनत से धन अर्जित करने की क्षमता को दर्शाता है। सिर के पिछले हिस्से पर मस्सा होना भी सौभाग्य का प्रतीक माना गया है।
सावधानी और अन्य संकेत
सभी निशान शुभ ही हों, ऐसा आवश्यक नहीं है। उदाहरण के तौर पर, पलक पर मस्सा होना हस्तरेखा विज्ञान में बहुत अच्छा नहीं माना जाता है। माना जाता है कि ऐसी स्थिति में व्यक्ति को जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। इसी प्रकार, यदि सिर और गर्दन के जोड़ पर अचानक मस्सा उभर आए, तो इसे सतर्क रहने का संकेत माना जाता है, जो चोट या दुर्घटना की ओर इशारा कर सकता है।समय के साथ शरीर पर आने वाले नए निशानों का भी अपना महत्व है। नाक पर मस्सा आना नए वस्त्रों की प्राप्ति, जबकि कान पर मस्सा आना ज्ञान और आभूषण मिलने का संकेत माना जाता है। वहीं, हाथों और उंगलियों पर मस्सों का उभरना धन आगमन और सौभाग्य का सूचक माना गया है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ये सभी व्याख्याएं पारंपरिक हस्तरेखा विज्ञान की मान्यताओं पर आधारित हैं।
