आज का पंचांग (2 नवंबर , 2026)

2

November
2026

06:33 - 17:3524:40 - 13:26
November 2, 2026
moon

17, अष्टमी

कृष्ण पक्ष, 2082 विक्रम सम्वत

आश्लेषा

नई दिल्ली, India

SundayMondayTuesdayWednesdayThursdayFridaySaturday

सप्तमी - 14:53
कृष्ण

1

16
पुष्य - 28:31

06:32 23:34

अष्टमी - 13:12
कृष्ण

2

17
आश्लेषा - 27:47

06:33 24:40

नवमी - 11:56
कृष्ण

3

18
मघा - 27:27

06:34 25:41

दशमी - 11:05
कृष्ण

4

19
पूर्वा फाल्गुनी - 27:30

06:34 26:41

एकादशी - 10:37
कृष्ण

5

20
उत्तरा फाल्गुनी - 27:56

06:35 27:40

द्वादशी - 10:32
कृष्ण

6

21
हस्त - 28:43

06:36 28:37

त्रयोदशी - 10:49
कृष्ण

7

22
चित्रा - 29:52

06:37 29:36

चतुर्दशी - 11:29
कृष्ण

8

23
स्वाति - पूर्ण रात्रि

06:37 30:34

अमावस्या - 12:33
कृष्ण

9

24
स्वाति - 07:24

06:38 चन्द्रोदय नहीं

प्रतिपदा - 14:01
शुक्ल

10

25
विशाखा - 09:19

06:39 07:32

द्वितीया - 15:54
शुक्ल

11

26
अनुराधा - 11:38

06:40 08:31

तृतीया - 18:10
शुक्ल

12

27
ज्येष्ठा - 14:19

06:40 09:26

चतुर्थी - 20:44
शुक्ल

13

28
मूल - 17:17

06:41 10:16

पंचमी - 23:25
शुक्ल

14

29
पूर्वाषाढ़ा - 20:24

06:42 11:01

षष्ठी - 26:02
शुक्ल

15

30
उत्तराषाढ़ा - 23:29

06:43 11:41

सप्तमी - 28:21
शुक्ल

16

31
श्रवण - 26:17

06:44 12:16

अष्टमी - 30:06
शुक्ल

17

2
धनिष्ठा - 28:35

06:44 12:48

नवमी - पूर्ण रात्रि
शुक्ल

18

3
शतभिषा - 30:10

06:45 13:18

नवमी - 07:07
शुक्ल

19

4
पूर्वाभाद्रपद - पूर्ण रात्रि

06:46 13:46

दशमी - 07:17, एकादशी - 30:33
शुक्ल

20

5
पूर्वाभाद्रपद - 06:57

06:47 14:16

द्वादशी - 28:58
शुक्ल

21

6
उत्तराभाद्रपद - 06:51, रेवती - 29:55

06:48 14:48

त्रयोदशी - 26:39
शुक्ल

22

7
अश्विनी - 28:16

06:48 15:24

चतुर्दशी - 23:44
शुक्ल

23

8
भरणी - 26:03

06:49 16:06

पूर्णिमा - 20:25
शुक्ल

24

9
कृत्तिका - 23:26

06:50 16:56

प्रतिपदा - 16:52
कृष्ण

25

10
रोहिणी - 20:37

06:51 17:53

द्वितीया - 13:17
कृष्ण

26

11
मृगशिरा - 17:48

06:52 19:00

तृतीया - 09:51, चतुर्थी - 30:42
कृष्ण

27

12
आर्द्रा - 15:09

06:52 20:11

पंचमी - 27:59
कृष्ण

28

13
पुनर्वसु - 12:51

06:53 21:22

षष्ठी - 25:48
कृष्ण

29

14
पुष्य - 11:00

06:54 22:30

सप्तमी - 24:13
कृष्ण

30

15
आश्लेषा - 09:42

06:55 23:36

अष्टमी - 23:15
कृष्ण

1

16
मघा - 09:01

06:55 24:37

नवमी - 22:54
कृष्ण

2

17
पूर्वा फाल्गुनी - 08:55

06:56 25:36

दशमी - 23:05
कृष्ण

3

18
उत्तरा फाल्गुनी - 09:24

06:57 26:33

एकादशी - 23:46
कृष्ण

4

19
हस्त - 10:23

06:58 27:30

द्वादशी - 24:53
कृष्ण

5

20
चित्रा - 11:49

06:59 28:27

पंचांग

FAQs

मासिक पंचांग क्या होता है?

मासिक पंचांग एक वैदिक कैलेंडर है जो पूरे महीने के तिथियों, नक्षत्रों, योग, करण, वार, चंद्र राशि, सूर्योदय-सूर्यास्त समय, व्रत-त्योहार और शुभ मुहूर्त की जानकारी प्रदान करता है।

क्या मासिक पंचांग सभी स्थानों के लिए समान होता है?

मासिक पंचांग कहां से प्राप्त करें?

मासिक पंचांग का क्या महत्व है?

हिंदू कैलेंडर में दिन की शुरुआत स्थानीय सूर्योदय से मानी जाती है और यह अगले दिन के सूर्योदय पर समाप्त होता है। चूँकि प्रत्येक स्थान पर सूर्योदय का समय अलग होता है, इसलिए जो हिंदू कैलेंडर एक शहर के लिए उपयुक्त होता है, वह किसी अन्य स्थान के लिए सही नहीं माना जा सकता। इसी कारण, स्थान-विशिष्ट कैलेंडर जैसे कि https://www.bhaktitimes.in/ का उपयोग करना अधिक सटीक और आवश्यक होता है।1
मासिक पंचांग क्या है

हिंदू धर्म में पंचांग का बहुत ही विशेष स्थान होता है। जैसे कि दैनिक पंचांग हमें रोज़मर्रा के शुभ-अशुभ समय, तिथि, नक्षत्र, योग और करण की जानकारी देता है, वैसे ही मासिक पंचांग (Monthly Panchang) पूरे महीने के महत्वपूर्ण ज्योतिषीय योगों, व्रत-त्योहारों और ग्रह गोचर की स्थिति का संपूर्ण विवरण प्रदान करता है।1

मासिक पंचांग क्या होता है?

मासिक पंचांग एक प्रकार का हिंदू कैलेंडर है, जिसमें एक पूर्ण मास के सभी दिन, तिथियाँ, वार, नक्षत्र, योग, करण, चंद्रमा की स्थिति, सूर्य की राशि परिवर्तन (सूर्य संक्रांति) और प्रमुख पर्वों का विवरण शामिल होता है। यह पंचांग न केवल धार्मिक कार्यों के लिए उपयोगी होता है बल्कि जीवन के हर क्षेत्र — जैसे विवाह, गृह प्रवेश, व्यवसाय आरंभ या यात्रा — के लिए भी शुभ समय जानने में सहायक होता है।

मासिक पंचांग का महत्व

मासिक पंचांग हमें यह बताता है कि आने वाले महीने में कौन-कौन से शुभ मुहूर्त, व्रत-त्योहार, अमावस्या-पूर्णिमा, एकादशी, प्रदोष, संक्रांति, और ग्रहों के गोचर कब पड़ रहे हैं। यह जानकारी व्यक्ति को अपने कार्यों की योजना बनाने में मदद करती है ताकि वह गलत समय या अशुभ योग में कोई बड़ा कार्य आरंभ न करे। वैदिक परंपरा में माना गया है कि समय का अपना एक प्रभाव होता है, और सही समय पर किए गए कार्यों का फल भी अधिक शुभ और स्थायी होता है।

मासिक पंचांग कैसे बनाया जाता है?

मासिक पंचांग की गणना सूर्य और चंद्रमा की गति के आधार पर की जाती है। इसमें मुख्यतः पाँच अंग होते हैं —
1 तिथि (Tithi) – चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोण से तय होती है।
2 वार (Vaar) – सात दिनों के नाम जैसे रविवार, सोमवार आदि।
3 नक्षत्र (Nakshatra) – चंद्रमा जिस नक्षत्र में रहता है, वही उस दिन का नक्षत्र कहलाता है।
4 योग (Yoga) – सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त गति से बनने वाले योग।
5 करण (Karana) – आधी तिथि को दर्शाने वाला भाग।
इन सभी पाँच अंगों को मिलाकर "पंचांग" कहा जाता है। संस्कृत में ‘पंचांग’ शब्द ‘पंच’ (अर्थात पाँच) और ‘अंग’ (अर्थात भाग) से मिलकर बना है। इसलिए, वह हिंदू कैलेंडर जो इन सभी पाँच अंगों को प्रदर्शित करता है, पंचांग कहलाता है। दक्षिण भारत में इसे ‘पंचांगम’ के नाम से जाना जाता है।