आजकल फैशन और ज्योतिषीय मान्यताओं के चलते बहुत से लोग सांप या कछुए की आकृति वाली अंगूठियां पहनते हैं। कई लोग इन्हें एक साथ भी धारण करते हैं, लेकिन क्या ऐसा करना ज्योतिष की दृष्टि से सही है? अक्सर लोग किसी को देखकर या बिना सोचे-समझे ऐसी अंगूठियां पहन लेते हैं, जबकि ज्योतिष शास्त्र में इसे लेकर कुछ महत्वपूर्ण नियम बताए गए हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, किसी भी अंगूठी को केवल उसकी आकृति के आधार पर धारण करना उचित नहीं है। विशेष रूप से जब बात रत्न जड़ित अंगूठियों की हो, तो कुंडली का विश्लेषण करना अनिवार्य हो जाता है। यदि आप बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के इन्हें पहनते हैं, तो यह आपकी जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति के विपरीत प्रभाव डाल सकता है।
अंगूठी और ग्रहों का संबंध
अक्सर लोग सांप की आकृति को राहु-केतु और कछुए को शनि का प्रतीक मान लेते हैं, लेकिन ज्योतिष के नजरिए से यह पूरी तरह सही नहीं है। किसी अंगूठी का प्रभाव उसमें लगे रत्न और उससे संबंधित ग्रह पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, यदि सांप की अंगूठी में गोमेद लगा है, तो वह राहु से संबंधित मानी जाएगी, वहीं लहसुनिया होने पर केतु का प्रभाव देखा जाएगा।इसी तरह, कछुए की आकृति को स्थिरता और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इसे किसी एक ग्रह से जोड़कर देखना गलत है। जब अंगूठी में रत्न जड़ा हो, तो उस रत्न के स्वामी ग्रह की स्थिति के अनुसार ही उसका फल मिलता है। इसलिए, केवल आकृति देखकर उसे किसी ग्रह का प्रतिनिधि मान लेना उचित नहीं है।
धारण करने के नियम और सावधानियां
यदि अंगूठी केवल धातु (जैसे सोना या चांदी) की बनी है और उसमें कोई रत्न नहीं है, तो उसे सीधे अशुभ नहीं कहा जा सकता। हालांकि, रत्न वाली अंगूठी के लिए दिन का चयन संबंधित ग्रह के अनुसार ही करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के लिए अलग-अलग दिन निर्धारित हैं, जैसे रविवार सूर्य के लिए, सोमवार चंद्र के लिए, मंगलवार मंगल के लिए, बुधवार बुध के लिए, गुरुवार गुरु के लिए, शुक्रवार शुक्र के लिए और शनिवार शनि के लिए शुभ माना जाता है।विशेषज्ञों की सलाह है कि बिना अपनी कुंडली दिखाए कई शक्तिशाली रत्नों को एक साथ धारण करने से बचें। सांप और कछुए की अंगूठी को एक साथ पहनने के मामले में भी यही नियम लागू होता है। यदि आप इन्हें पहनना चाहते हैं, तो पहले किसी कुशल ज्योतिषी से अपनी जन्मकुंडली का विश्लेषण करवाएं। अंगूठी धारण करते समय धातु, रत्न, संबंधित ग्रह और कुंडली में उस ग्रह की वर्तमान स्थिति का तालमेल बिठाना सबसे महत्वपूर्ण है। बिना सोचे-समझे किया गया चयन शुभ फल देने के बजाय विपरीत परिणाम भी दे सकता है।
