व्रत त्योहार

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा और बर्तन खरीदने की परंपरा का क्या है रहस्य?

धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा क्यों की जाती है और इस दिन बर्तन व सोना खरीदने की परंपरा कैसे शुरू हुई? जानिए समुद्र मंथन से जुड़ी इस खास कथा और इसके महत्व के बारे में।

Image

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा और बर्तन खरीदने की परंपरा का क्या है रहस्य?

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाए जाने वाले धनतेरस के त्योहार का विशेष धार्मिक महत्व है। यह पर्व दिवाली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। धनतेरस के दिन धन की देवी माता लक्ष्मी और कुबेर देव के साथ-साथ भगवान धन्वंतरि की पूजा करने की परंपरा है। इस दिन को लेकर भक्तों के मन में अक्सर यह जिज्ञासा होती है कि आखिर धन्वंतरि देव की पूजा क्यों की जाती है और इस दिन नए बर्तन या सोना-चांदी खरीदने की प्रथा कैसे शुरू हुई।

इन सभी सवालों के जवाब पौराणिक कथाओं, विशेषकर समुद्र मंथन की घटना में छिपे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस का सीधा संबंध समुद्र मंथन से है। इसी दिन भगवान धन्वंतरि समुद्र से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। यही कारण है कि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को उनके प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है और इस दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।