कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाए जाने वाले धनतेरस के त्योहार का विशेष धार्मिक महत्व है। यह पर्व दिवाली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। धनतेरस के दिन धन की देवी माता लक्ष्मी और कुबेर देव के साथ-साथ भगवान धन्वंतरि की पूजा करने की परंपरा है। इस दिन को लेकर भक्तों के मन में अक्सर यह जिज्ञासा होती है कि आखिर धन्वंतरि देव की पूजा क्यों की जाती है और इस दिन नए बर्तन या सोना-चांदी खरीदने की प्रथा कैसे शुरू हुई।
इन सभी सवालों के जवाब पौराणिक कथाओं, विशेषकर समुद्र मंथन की घटना में छिपे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस का सीधा संबंध समुद्र मंथन से है। इसी दिन भगवान धन्वंतरि समुद्र से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। यही कारण है कि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को उनके प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है और इस दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
समुद्र मंथन और बर्तन खरीदने की परंपरा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था, तब उसमें से चौदह रत्न निकले थे। इन्हीं रत्नों में से एक भगवान धन्वंतरि थे, जो अपने हाथों में अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे। चूंकि वे कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन बर्तनों की खरीदारी को अत्यंत शुभ माना जाता है। यह परंपरा उसी पौराणिक घटना की याद दिलाती है।
प्राचीन काल में लोग धनतेरस के दिन विशेष रूप से कलश या घड़े जैसे बर्तन खरीदते थे, जिनका उपयोग पूजा-पाठ और घर की शुद्धि के कार्यों में किया जाता था। समय के साथ यह परंपरा विकसित होती गई और आज लोग अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार बर्तन, सोना और चांदी जैसी शुभ वस्तुएं खरीदते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मकता का संचार होता है।
भगवान धन्वंतरि का महत्व
धार्मिक ग्रंथों में भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का ही एक अंश माना गया है, इसीलिए उनकी छवि में विष्णु जी की झलक दिखाई देती है। उनके हाथों में कलश के साथ-साथ औषधियां भी होती हैं, जो उन्हें चिकित्सा विज्ञान के देवता के रूप में प्रतिष्ठित करती हैं। मान्यता है कि उन्होंने ही संसार में चिकित्सा पद्धति का प्रसार किया था।
समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने के ठीक दो दिन बाद माता लक्ष्मी समुद्र से बाहर आई थीं। यही कारण है कि धन्वंतरि जयंती के दो दिन बाद दिवाली का महापर्व मनाया जाता है, जिसमें लक्ष्मी पूजन का विधान है। धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा करना स्वास्थ्य और आरोग्य की कामना के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
