दीपावली के महापर्व की शुरुआत धनतेरस के साथ होती है। इस वर्ष धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा-अर्चना की जाती है।
इस दिन खरीदारी को लेकर विशेष उत्साह रहता है। हालांकि, धनतेरस का अर्थ केवल महंगी वस्तुओं की खरीदारी नहीं है, बल्कि उन चीजों को घर लाना है जो सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती हैं। वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर, आप अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार शुभ वस्तुओं का चयन कर सकते हैं।
धनतेरस पर खरीदारी के लिए शुभ वस्तुएं और वास्तु टिप्स
धनतेरस पर सोना और चांदी खरीदना सबसे प्रचलित परंपरा है। सोना स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, जबकि चांदी को शुद्धता का सूचक माना गया है। यदि आप सोना या चांदी खरीद रहे हैं, तो उनकी शुद्धता की जांच अवश्य करें। इसके अलावा, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि के अमृत कलश के साथ प्रकट होने की कथा के कारण, इस दिन पीतल, तांबे या स्टील के नए बर्तन खरीदना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
पूजा के दृष्टिकोण से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की नई प्रतिमाएं, मिट्टी के दीये या सजावटी लैंप खरीदना भी शुभ होता है। इसके साथ ही, कई स्थानों पर झाड़ू को मां लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए नया झाड़ू खरीदना भी शुभ माना गया है। अन्य शुभ वस्तुओं में साबुत धनिया, घर के उपयोग का नया सामान, या कार्यक्षेत्र से जुड़ी नई मशीनरी व उपकरण शामिल हैं।
घर में सकारात्मक ऊर्जा के संचार के लिए कुछ वास्तु उपाय भी अपनाए जा सकते हैं। धनतेरस से पहले घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) की विशेष सफाई करें और वहां कबाड़ जमा न होने दें। मुख्य द्वार को फूलों के तोरण और रंगोली से सजाएं। पूजा घर को व्यवस्थित करें और शाम के समय दीपक जलाकर यम दीपदान की परंपरा का पालन करें।
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कुछ चीजों की खरीदारी से परहेज भी किया जाता है। इनमें मुख्य रूप से धारदार या नुकीली वस्तुएं, लोहे का सामान और काले रंग की वस्तुएं शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि त्योहार के नाम पर अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक खर्च न करें। घर की स्वच्छता, श्रद्धापूर्वक पूजा और परिवार के साथ खुशियां साझा करना ही इस त्योहार का वास्तविक सार है।
