दिवाली का त्योहार धन की देवी मां लक्ष्मी के स्वागत का पर्व है। इस दिन घरों को सजाने और मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए भक्त कई तरह के उपाय करते हैं, जिनमें से एक है घर के मुख्य द्वार पर मां लक्ष्मी के चरण चिह्न लगाना। वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि इन चरण चिह्नों को सही दिशा और विधि के साथ लगाया जाए, तो यह घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि लाने में सहायक माने जाते हैं।
वास्तु के अनुसार, चरण चिह्नों को लगाने का सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि उनकी दिशा हमेशा घर के अंदर की ओर होनी चाहिए। इसका अर्थ है कि मां लक्ष्मी के पैरों की उंगलियां घर के भीतर की तरफ दिखनी चाहिए, जो यह दर्शाता है कि देवी लक्ष्मी बाहर से घर में प्रवेश कर रही हैं।
चरण चिह्न लगाने के लिए सही स्थान और दिशा
मां लक्ष्मी के चरण चिह्न लगाने के लिए घर का मुख्य द्वार सबसे उत्तम स्थान माना गया है, क्योंकि यही वह मार्ग है जहां से देवी का आगमन होता है। इसके अलावा, यदि आप पूजा घर या धन रखने वाली तिजोरी के पास चरण चिह्न लगाना चाहते हैं, तो उनका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है।
चरण चिह्न लगाते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। इन्हें कभी भी सीधे जमीन पर नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि इस पर किसी के पैर पड़ने की संभावना रहती है। इन्हें हमेशा चौखट या थोड़ी ऊंचाई पर लगाना चाहिए। इसके साथ ही, इन्हें जोड़े में ही लगाएं, कभी भी एक पैर का चिह्न न लगाएं। जिस स्थान पर आप इन्हें लगा रहे हैं, वहां पहले गंगाजल छिड़क कर उसे शुद्ध जरूर कर लें।
इन स्थानों पर न लगाएं चरण चिह्न
वास्तु के नियमों के अनुसार, कुछ स्थानों पर चरण चिह्न लगाना वर्जित माना गया है। इन्हें कभी भी बाथरूम या टॉयलेट के आसपास नहीं लगाना चाहिए। साथ ही, घर के ऐसे कोने जहां अंधेरा रहता हो या जहां कूड़ा-कचरा जमा होता हो, वहां भी इन्हें न लगाएं। चरण चिह्नों के आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और वहां कूड़ेदान या पुराने जूते-चप्पल न रखें।
रंगों का चयन करते समय ध्यान रखें कि मां लक्ष्मी को लाल, गुलाबी और सुनहरा रंग प्रिय है, इसलिए चरण चिह्न इन्हीं रंगों के होने चाहिए। काले या नीले रंग का प्रयोग करने से बचें। यदि आप स्वयं सिंदूर से चरण चिह्न बना रहे हैं, तो उनके दोनों तरफ स्वास्तिक बनाना शुभ माना जाता है। यदि आप स्टिकर का उपयोग कर रहे हैं, तो अगले साल पुराने स्टिकर को कचरे में फेंकने के बजाय किसी पेड़ के नीचे या बहते जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। दिवाली पर मुख्य द्वार पर मिट्टी या चांदी के चरण चिह्न लगाना और साथ में तोरण व दीपक जलाना ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाने वाला माना जाता है।
