Navratri 2026: नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है। देवी का यह स्वरूप ममता, वात्सल्य, करुणा और संतान सुख का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता को केले का भोग अत्यंत प्रिय है। यही वजह है कि नवरात्रि के पांचवें दिन भक्त माता रानी को केला अर्पित करते हैं और बाद में इसे प्रसाद के रूप में परिवार तथा अन्य लोगों में बांटते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मां स्कंदमाता की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। आइए जानते हैं मां स्कंदमाता का प्रिय भोग (Maa Skandamata Bhog) क्या है और पूजा में किन चीजों को शामिल करना शुभ माना जाता है।
मां स्कंदमाता का प्रिय भोग
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाने की परंपरा प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं में केला शुभता और समृद्धि से जुड़ा माना जाता है। भक्त देवी को केले अर्पित करके परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। पूजा के बाद केले को प्रसाद के रूप में बांटना भी शुभ माना जाता है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में देवी को अर्पित किए जाने वाले भोग में अंतर हो सकता है।
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केले से बने पकवानों का भोग
यदि आप मां स्कंदमाता को कुछ विशेष अर्पित करना चाहते हैं, तो केले से बने फलाहारी पकवान तैयार कर सकते हैं। पूजा में केले का हलवा, केले की खीर या अन्य सात्विक व्यंजन शामिल किए जा सकते हैं। व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा और व्रत के नियमों के अनुसार इन पकवानों को तैयार कर सकते हैं। भोग बनाते समय साफ-सफाई और शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। साथ ही, भोग में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी व्रत के अनुकूल होनी चाहिए।
पीले रंग की मिठाइयों का भोग
मां स्कंदमाता की पूजा में पीले रंग की मिठाइयां और पकवान भी अर्पित किए जा सकते हैं। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार बेसन के लड्डू, केसर वाली खीर या अन्य सात्विक मिठाइयों का भोग लगाते हैं। पीले रंग को शुभता और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, देवी को भोग अर्पित करने के लिए किसी विशेष महंगे पकवान की जरूरत नहीं है। श्रद्धा और भक्ति भाव से अर्पित किया गया सात्विक प्रसाद ही पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
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पंचामृत और ताजे फल का भोग
मां स्कंदमाता की पूजा में केले के साथ पंचामृत और मौसमी फलों को भी शामिल किया जा सकता है। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पारंपरिक रूप से पंचामृत तैयार किया जाता है। इसे पूजा में अर्पित करने की परंपरा है। इसके अलावा सेब, अनार और अन्य ताजे फल भी भोग में रख सकते हैं। पूजा के दौरान स्वच्छता का ध्यान रखें और देवी को भोग अर्पित करने के बाद प्रसाद सभी में बांटें।
स्कंदमाता की पूजन से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता की उपासना करने से भक्तों को सुख, शांति और संतान सुख का आशीर्वाद प्राप्त होता है। देवी का स्वरूप मां की ममता और अपने भक्तों के प्रति करुणा का संदेश देता है। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर भक्त उनसे परिवार की खुशहाली, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं। इन मान्यताओं का आधार धार्मिक आस्था और परंपराएं हैं।
