Navratri: नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा साहस, शांति और शक्ति का प्रतीक हैं। उनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, इसलिए उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से मां की आराधना करने से भक्तों को मानसिक शांति और आत्मविश्वास मिलता है। आइए जानते हैं कि नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा कैसे करें और किन मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है।
मां चंद्रघंटा का बीज मंत्र क्या है?
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा के दौरान उनके मंत्रों का जाप किया जाता है। इससे भक्तों को ध्यान लगाने और पूजा में मन एकाग्र करने में मदद मिल सकती है। मां चंद्रघंटा की आराधना के लिए इस मंत्र का जाप कर सकते हैं।
मंत्र: ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः।
इसके अलावा, मां दुर्गा की स्तुति के लिए इस मंत्र का पाठ भी किया जाता है:
या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
आप अपनी श्रद्धा और सुविधानुसार पूजा के दौरान मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
मां चंद्रघंटा को चढ़ाएं सफेद फूल
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा में फूलों का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां को सफेद फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। आप पूजा के दौरान सफेद फूलों की माला चढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, चंपा के फूल और सुगंधित इत्र भी अर्पित कर सकते हैं।
पूजा शुरू करने से पहले कलश की पूजा करें। इसके बाद भगवान गणेश, मां लक्ष्मी, भगवान कार्तिकेय और मां सरस्वती का स्मरण करें। फिर मां चंद्रघंटा की पूजा करें। उन्हें जल, फूल, अक्षत और अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। आखिर में मां दुर्गा की आरती करके सुख-शांति की प्रार्थना करें।
मां चंद्रघंटा की पूजा में सिंदूर का महत्व
नवरात्रि में मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है। भक्त अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार मां के चरणों में या तिलक के रूप में सिंदूर चढ़ा सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं में सिंदूर को शुभता और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है।
हालांकि, सिंदूर से जुड़े उपायों को आस्था और परंपरा के नजरिए से ही देखना चाहिए। यह दावा करना सही नहीं है कि सिंदूर लगाने से गरीबी दूर होना या बुरी नजर से बचाव होना निश्चित है। पूजा में श्रद्धा और स्वच्छता का ध्यान रखना अधिक जरूरी है।
घर में घंटी बजाने की क्या है मान्यता?
मां चंद्रघंटा के स्वरूप में घंटे का विशेष महत्व है। इसी वजह से पूजा के दौरान घंटी बजाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, घंटी की ध्वनि से पूजा का वातावरण पवित्र और सकारात्मक बनता है। आप पूजा करते समय मंदिर या पूजा स्थल पर घंटी बजा सकते हैं। कुछ लोग घर के अलग-अलग हिस्सों में भी घंटी बजाते हैं। हालांकि, इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होने या भविष्य में अच्छी खबर मिलने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसे धार्मिक आस्था से जुड़ी परंपरा के रूप में समझना चाहिए।
मां चंद्रघंटा की पूजा करते समय इन बातों का रखें ध्यान
नवरात्रि के तीसरे दिन सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें और शांत मन से पूजा करें। मां को फूल, अक्षत और अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित करें। मंत्र जाप के दौरान उच्चारण पर ध्यान दें और जल्दबाजी न करें। अगर आप व्रत रख रहे हैं, तो अपनी सेहत का भी ध्यान रखें।
मां चंद्रघंटा की आराधना का उद्देश्य श्रद्धा, आत्मविश्वास और मन की शांति को बढ़ाना है। इसलिए दिखावे के बजाय सच्चे मन से पूजा करें और अपने जीवन में अच्छे विचारों और व्यवहार को अपनाने का प्रयास करें।
