Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होने जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि का आरंभ जिस दिन होता है, उसी के आधार पर मां दुर्गा के वाहन का निर्धारण किया जाता है। इस बार नवरात्रि की शुरुआत रविवार के दिन हो रही है, जिसके चलते मां दुर्गा का वाहन 'हाथी' माना गया है। शास्त्रों और लोक परंपराओं में हाथी को सुख, समृद्धि, धैर्य और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए मां का इस सवारी पर आगमन काफी शुभ माना जा रहा है।
नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की सवारी को लेकर श्रद्धालुओं में हमेशा विशेष उत्सुकता रहती है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, यदि नवरात्रि रविवार या सोमवार से शुरू होती है, तो मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। वहीं, मंगलवार और शनिवार को नवरात्रि शुरू होने पर मां का वाहन घोड़ा, बुधवार को नाव और गुरुवार या शुक्रवार को पालकी माना जाता है। हर वाहन के अपने अलग धार्मिक संकेत और मान्यताएं जुड़ी होती हैं।
हाथी पर आगमन का महत्व और नवरात्रि की तैयारी
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, हाथी पर मां दुर्गा का आगमन आर्थिक जीवन और पारिवारिक सुख-शांति के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है। इसे स्थिरता का प्रतीक माना गया है, जिससे जीवन में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद की जाती है। हालांकि, विद्वानों का मानना है कि इसका प्रभाव हर व्यक्ति पर एक समान हो, यह आवश्यक नहीं है, क्योंकि व्यक्तिगत फलादेश के लिए जन्मकुंडली और ग्रहों की स्थिति का आकलन करना भी महत्वपूर्ण होता है।
नवरात्रि के पहले दिन, यानी 11 अक्टूबर को कलश स्थापना के साथ नौ दिवसीय अनुष्ठान का शुभारंभ होगा। प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात से ही लग जाएगी, लेकिन उदया तिथि (सूर्योदय के समय वाली तिथि) के अनुसार 11 अक्टूबर को ही पहला नवरात्र माना जाएगा। इस दिन मां के प्रथम स्वरूप 'मां शैलपुत्री' की पूजा-अर्चना की जाएगी। घरों और मंदिरों में कलश स्थापना के साथ ही जौ बोने की परंपरा भी निभाई जाएगी।
नौ दिनों तक चलेगी मां की आराधना
नवरात्रि के इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कूष्मांडा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी और नौवें दिन सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार व्रत रखते हैं और मां को फल, फूल व मिठाई का भोग लगाते हैं।
पर्व के अंतिम दिनों में अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इस दौरान कन्याओं को भोजन कराकर और उपहार देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। नवरात्रि का यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और सुख-समृद्धि की कामना का समय भी है। यद्यपि मां की सवारी से जुड़े संकेत अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य श्रद्धा और भक्ति के साथ मां दुर्गा की आराधना करना ही है।
