Aja Ekadashi 2026: सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष स्थान है। हर महीने आने वाली दो एकादशियों में से भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को 'अजा एकादशी' के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करने से भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है और अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है। पद्म पुराण में भी इस व्रत के महात्म्य का विस्तार से वर्णन किया गया है।
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में भाद्रपद कृष्ण एकादशी तिथि का आरंभ 6 सितंबर, रविवार की शाम 7 बजकर 30 मिनट पर होगा। यह तिथि अगले दिन यानी 7 सितंबर, सोमवार की शाम 5 बजकर 5 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि (सूर्योदय के समय व्याप्त तिथि) की मान्यता के अनुसार, अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर को रखा जाना अत्यंत शुभ और पुण्य फलदायी माना गया है।
अजा एकादशी: पूजा विधि और व्रत के नियम
अजा एकादशी के दिन व्रती को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना अनिवार्य है। पूजा के लिए घर के मंदिर को साफ कर एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं और उस पर भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।पूजा के दौरान गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण करें। एक पात्र में पवित्र जल, अक्षत (चावल), तिल और रोली मिलाकर भगवान का अभिषेक करें। इसके बाद उन्हें धूप, दीप और ताजे फूल अर्पित करें। पूजा के दौरान अजा एकादशी व्रत कथा का पाठ करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। भोग के रूप में तुलसी जल और तिल का उपयोग करना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने और रात्रि में श्रीहरि के भजनों का जागरण करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
