भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को पूरे भारत में गणेश चतुर्थी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन तिथि 14 सितंबर को पड़ रही है। विघ्नहर्ता भगवान गणेश को सभी देवताओं में प्रथम पूजनीय माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित कर उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
गणेश चतुर्थी का यह उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि इसका गहरा संबंध ज्योतिष शास्त्र से भी माना जाता है। पुराणों में वर्णित कथाओं और ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर, भगवान गणेश की उपासना को ग्रहों के दोषों को दूर करने का एक प्रभावी माध्यम माना गया है। विशेष रूप से केतु और बुध ग्रह से जुड़ी समस्याओं के निवारण में गणेश पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
केतु दोष और गणेश पूजा का संबंध
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश का संबंध केतु ग्रह से जोड़ा जाता है। इसके पीछे का तर्क यह है कि केतु को एक धड़ के रूप में माना जाता है, जिसका सिर नहीं है। पौराणिक कथाओं में जब भगवान शिव ने गणेश जी को हाथी का मस्तक प्रदान किया, तो उस स्वरूप को केतु की स्थिति से जोड़कर देखा गया। केतु को ज्ञान, आध्यात्मिकता और जीवन में आने वाले अचानक परिवर्तनों का कारक माना जाता है।ज्योतिष शास्त्र के जानकारों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति के जीवन में भ्रम की स्थिति बनी हुई है या बनते हुए काम बार-बार बिगड़ रहे हैं, तो यह केतु के अशुभ प्रभाव का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में विघ्नहर्ता गणेश की पूजा करना बाधाओं को दूर करने और मानसिक स्पष्टता प्राप्त करने में सहायक मानी जाती है।
बुध ग्रह की शांति और गणेश उपासना
भगवान गणेश को बुद्धि और विवेक का अधिष्ठाता देव माना गया है, जबकि ज्योतिष में बुध ग्रह को वाणी, तर्क, शिक्षा और व्यापार का कारक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिन जातकों की कुंडली में बुध कमजोर स्थिति में होता है या अशुभ फल दे रहा होता है, उनके लिए बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।बुध ग्रह का संबंध हरे रंग से है और भगवान गणेश की पूजा में हरी दूर्वा (घास) का विशेष महत्व है। मान्यता है कि बुधवार के दिन गणेश जी को 21 दूर्वा अर्पित करने से बुध के दोष शांत होते हैं। पूजा के दौरान 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, बुध की शांति के लिए 'ॐ बुं बुधाय नमः' मंत्र का उच्चारण करने की भी परंपरा है। इस दिन हरी मूंग की दाल का दान करना और हरे रंग के वस्त्र धारण करना भी बुध ग्रह से संबंधित उपायों में शामिल है।
