इस वर्ष जन्माष्टमी का पावन पर्व 4 सितंबर 2026 को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाने वाली यह तिथि भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को पड़ती है। इस बार की जन्माष्टमी विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वर्षों बाद इस दिन कई शुभ योगों का दुर्लभ संयोग बन रहा है।
इस साल जन्माष्टमी पर जयंती योग, हंस योग, मालव्य राजयोग, बुधादित्य राजयोग और हर्ष योग का अद्भुत मेल देखने को मिलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन योगों में व्रत रखने से भक्तों को विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। पद्म पुराण और निर्णय सिंधु जैसे ग्रंथों में जयंती योग में जन्माष्टमी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है, जिसे पूर्व जन्मों के पापों का शमन करने वाला माना जाता है।
जन्माष्टमी 2026: रोहिणी नक्षत्र और जयंती योग का महत्व
पंचांग गणना के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र 3 सितंबर की रात 12 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर 4 सितंबर की रात 11 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। इस प्रकार, 4 सितंबर को रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि का शुभ संयोग बन रहा है, जिसके कारण इस दिन जयंती योग का निर्माण हो रहा है। शास्त्रों में उल्लेख है कि जब जन्माष्टमी का व्रत रोहिणी नक्षत्र के साथ किया जाता है, तो यह तीन जन्मों के पापों को नष्ट करने में सहायक होता है।धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जयंती योग में व्रत करने से न केवल साधक को लाभ मिलता है, बल्कि यह पूर्वजों को भी प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने में सहायक माना गया है। यही कारण है कि इस दुर्लभ संयोग में स्त्री, पुरुष, वृद्ध और बच्चों सभी को पूरी श्रद्धा के साथ व्रत रखने का विधान बताया गया है।
