व्रत त्योहार

जन्माष्टमी पर पीरियड्स के दौरान व्रत और पूजा के नियम, जानें क्या कहती हैं मान्यताएं

जन्माष्टमी के पावन अवसर पर यदि मासिक धर्म (पीरियड्स) की स्थिति हो, तो व्रत और पूजा कैसे करें? ज्योतिषी और वास्तु गुरु मान्या से जानें इस दौरान पालन किए जाने वाले जरूरी नियम और सावधानियां।

Image

जन्माष्टमी व्रत मासिक धर्म में रख सकते हैं क्या

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व देशभर में पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन भक्त कान्हा की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं। हालांकि, कई बार महिलाओं के मन में यह सवाल उठता है कि यदि जन्माष्टमी के दौरान मासिक धर्म (पीरियड्स) की स्थिति हो, तो क्या व्रत रखा जा सकता है और पूजा कैसे की जानी चाहिए। ज्योतिष और वास्तु विशेषज्ञ मान्या के अनुसार, ऐसी स्थिति में भी व्रत और उपासना करना पूरी तरह से संभव है, क्योंकि शुद्धता का संकल्प मुख्य रूप से मन और आत्मा से जुड़ा होता है।

शास्त्रों के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान भी जन्माष्टमी का व्रत रखा जा सकता है। इस दौरान व्रती को सुबह उठकर पूजा घर को स्पर्श किए बिना ही मन ही मन उपवास का संकल्प लेना चाहिए। शास्त्रों में मानसिक पूजा को स्थूल पूजा से भी अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। आप अपनी आंखें बंद करके भगवान कृष्ण के जन्म और उनके अभिषेक का ध्यान कर सकती हैं। यह मानसिक समर्पण कान्हा की भक्ति का एक सरल और प्रभावी तरीका है।