श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व देशभर में पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन भक्त कान्हा की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं। हालांकि, कई बार महिलाओं के मन में यह सवाल उठता है कि यदि जन्माष्टमी के दौरान मासिक धर्म (पीरियड्स) की स्थिति हो, तो क्या व्रत रखा जा सकता है और पूजा कैसे की जानी चाहिए। ज्योतिष और वास्तु विशेषज्ञ मान्या के अनुसार, ऐसी स्थिति में भी व्रत और उपासना करना पूरी तरह से संभव है, क्योंकि शुद्धता का संकल्प मुख्य रूप से मन और आत्मा से जुड़ा होता है।
शास्त्रों के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान भी जन्माष्टमी का व्रत रखा जा सकता है। इस दौरान व्रती को सुबह उठकर पूजा घर को स्पर्श किए बिना ही मन ही मन उपवास का संकल्प लेना चाहिए। शास्त्रों में मानसिक पूजा को स्थूल पूजा से भी अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। आप अपनी आंखें बंद करके भगवान कृष्ण के जन्म और उनके अभिषेक का ध्यान कर सकती हैं। यह मानसिक समर्पण कान्हा की भक्ति का एक सरल और प्रभावी तरीका है।
पीरियड्स के दौरान पूजा और सेवा के नियम
यदि व्रत के दौरान आप मासिक धर्म में हैं, तो लड्डू गोपाल की सेवा के लिए घर के अन्य सदस्यों की सहायता लेना उचित रहता है। आप अपने पति, बच्चों या परिवार के किसी अन्य सदस्य से कहकर मध्य रात्रि में बाल गोपाल का अभिषेक करवा सकती हैं। कान्हा को वस्त्र पहनाना और भोग लगाने जैसे कार्य भी आप परिवार के किसी सदस्य के माध्यम से करवा सकती हैं।मंत्र जप के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इस दौरान तुलसी की माला या किसी भी अन्य जप माला को स्पर्श करना वर्जित माना गया है। आप बिना माला छुए उंगलियों पर या मन ही मन 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' या 'हरे कृष्ण' महामंत्र का जाप कर सकती हैं। इसके अलावा, आप अपने फोन या लैपटॉप पर कृष्ण जन्म की कथा सुन सकती हैं, श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का श्रवण कर सकती हैं और कीर्तन सुनकर अपने मन को सात्विक बनाए रख सकती हैं।
भोग और प्रसाद से जुड़ी सावधानियां
मासिक धर्म के दौरान लड्डू गोपाल के लिए पंजीरी या माखन-मिश्री जैसा भोग स्वयं नहीं बनाना चाहिए। इसके लिए भी परिवार के किसी सदस्य की मदद लेना बेहतर होता है। व्रती को उन्हीं के द्वारा तैयार किया गया प्रसाद या फलाहार ग्रहण करना चाहिए।हालांकि, यदि आपके मासिक धर्म के पांच दिन पूरे हो चुके हैं और रक्तस्राव पूरी तरह रुक गया है, तो आप शुद्धिकरण के बाद स्वयं प्रसाद बना सकती हैं। इसके लिए नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। शुद्धिकरण के बाद आप बिना किसी संकोच के रसोई में जाकर कान्हा के लिए सात्विक भोग तैयार कर सकती हैं। यह माना जाता है कि ऐसी स्थिति में आपकी आत्मिक शक्ति अधिक प्रबल होती है और आपकी सच्ची प्रार्थना कान्हा तक शीघ्र पहुंचती है।
