व्रत त्योहार

पिठोरी अमावस्या पर इन नियमों का करें पालन, पितरों की प्राप्त होगी विशेष कृपा

भाद्रपद अमावस्या यानी पिठोरी अमावस्या पर पितृ कर्म और दान का विशेष महत्व है। इस दिन किन कार्यों से बचना चाहिए और पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए क्या करना शुभ है, जानें विस्तार से।

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भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पिठोरी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन पितरों के तर्पण, पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस तिथि को कुशाग्रहणी अमावस्या भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन वर्ष भर पितृ कार्यों में उपयोग होने वाली कुश (एक प्रकार की पवित्र घास) को इकट्ठा करने की परंपरा है।

पिठोरी अमावस्या के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक माना जाता है। मान्यता है कि यदि इस दिन अनजाने में भी कुछ गलतियां की जाएं, तो पितर नाराज हो सकते हैं। इसलिए, इस दिन सात्विक आचरण और श्रद्धा भाव बनाए रखना बहुत जरूरी है।