Pitru Paksha 2026 (navami shradh puja ka shubh muhurat aur vidhi today): पितरों की पूजा के लिए पितृपक्ष का समय शुभ होता है। पंचांग के अनुसार, इस समय पितृपक्ष चल रहा है, जिसका समापन 10 अक्टूबर 2026 को होगा। आज 4 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है, जिस दिन पितृपक्ष की नवमी तिथि यानी नौवां श्राद्ध किया जाएगा। नवमी तिथि पर परिवार के उन मृतक सदस्यों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि पर हुई हो। शास्त्रों में नवमी श्राद्ध को मातृ नवमी, नौमी श्राद्ध और अविधवा श्राद्ध आदि नामों से जाना जाता है क्योंकि ये तिथि माता के श्राद्ध करने के लिए उपयुक्त होती है। इस तिथि पर श्राद्ध करने से परिवार की सभी मृतक महिला सदस्यों की आत्मा को शांति मिलती है। आइए अब जानें आज की पूजा का मुहूर्त और विधि के बारे में।
आश्विन कृष्ण नवमी तिथि 2026 का समय
- आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि का आरंभ- आज 4 अक्टूबर 2026 को सुबह 05:51 बजे
- आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि का समापन- कल 5 अक्टूबर 2026 को सुबह 03:53 बजे
- आश्विन कृष्ण नवमी तिथि- आज 4 अक्टूबर 2026, रविवार
मातृ नवमी की पूजा का शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, आज 4 अक्टूबर 2026 को पितृपक्ष के नौवें श्राद्ध यानी मातृ नवमी की पूजा कुतुप मुहूर्त और रौहिण मुहूर्त में की जा सकती है। आज कुतुप मुहूर्त सुबह 11:46 से लेकर दोपहर 12:33 बजे तक है, जबकि रौहिण मुहूर्त दोपहर 12:33 से दोपहर 01:20 बजे तक है। वहीं, पितृपक्ष से जुड़े सभी अनुष्ठान अपराह्न काल के समाप्त होने से पहले किए जाते हैं। अपराह्न काल आज दोपहर 01:20 बजे से लेकर दोपहर 03:42 बजे तक है।
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पितृपक्ष में तर्पण की विधि
- सुबह जल्दी उठने के बाद स्नान कर शुद्ध सफेद या पीले रंग के कपड़े धारण करें।
- शुभ मुहूर्त में गंगाजल से पूजा स्थल की दक्षिण दिशा को शुद्ध करें।
- इस दिशा में सबसे पहले कुश का आसन रखें। आसन पर स्वयं बैठें।
- हाथ में जल के साथ-साथ अक्षत, काले तिल और कुश लें। अब अपने नाम व गोत्र का उच्चारण करते हुए तर्पण का संकल्प लें।
- एक जनेऊ लें, जिसे अपने दाएं कंधे पर रखें।
- हाथ की अनामिका उंगली में कुश की अंगूठी पहनें।
- हाथ के अंगूठे और तर्जनी उंगली के बीच वाले भाग से जल और काले तिल की धारा पात्र में गिराएं। अब अपनी 3 पीढ़ियों (पिता, दादा और परदादा) का नाम और गोत्र बोलते हुए 'ॐ पितृभ्यो नमः' मंत्र का उच्चारण करें।
- अपने हाथों से सात्विक भोजन बनाएं। भोजन को गाय, कुत्ते, कौओं, चींटियों और देवताओं के लिए अलग से निकालें।
- भोजन वितरण करने के बाद गरीबों और ब्राह्मणों को भोजन करवाएं तथा अपनी क्षमता के अनुसार दान दें।
पितृपक्ष का समापन कब होगा?
10 अक्टूबर 2026, शनिवार को पितृपक्ष का समापन होगा, जिस दिन सर्वपितृ अमावस्या भी मनाई जाएगी। इस दिन ज्ञात और अज्ञात पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण तथा पिंडदान किया जाता है। इसके अलावा अन्न, धन, वस्त्र, काले तिल, छाता, फल, जूते-चप्पल, घी, गुड़ और तांबे या कांसे के बर्तनों का दान करना शुभ रहता है।
