4 Day Saraswati Puja Celebration 2026 (saraswati balidan ka samay aur vidhi): प्रत्येक वर्ष आश्विन माह में चार दिवसीय सरस्वती पूजा का उत्सव मनाया जाता है। इस उत्सव का पहला दिन सरस्वती आवाहन का होता है, जिसके बाद दूसरे दिन सरस्वती मुख्य पूजा, तीसरे दिन सरस्वती बलिदान पूजा और चौथे दिन सरस्वती विसर्जन होता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में 16 अक्टूबर से सरस्वती पूजा के उत्सव का आरंभ हुआ है। आज 18 अक्टूबर को चार दिवसीय सरस्वती पूजा का तीसरा दिन है, जिसे सरस्वती बलिदान के रूप में मनाया जाता है। यहां बलिदान का मतलब पशु-पक्षियों की बलि देने से नहीं, बल्कि माता सरस्वती को फल, फूल, मिठाई और शाकाहारी भोजन अर्पित करने से है। आज यहां पर आप सरस्वती बलिदान की पूजा के शुभ मुहूर्त से लेकर विधि के बारे में विस्तार से जानेंगे।
सरस्वती बलिदान की पूजा का समय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सरस्वती बलिदान की पूजा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में ही करनी चाहिए। आज 18 अक्टूबर को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का आरंभ दोपहर 12 बजकर 49 मिनट से हो रहा है, जो कि कल 19 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 38 मिनट पर समाप्त होगा। ऐसे में उत्तराषाढ़ा बलिदान मुहूर्त आज दोपहर 3 बजकर 32 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 49 मिनट तक रहेगा।
सरस्वती बलिदान की पूजा सामग्री लिस्ट
- फल (केला, बेर, सेब या संतरा)
- नारियल
- रोली
- अक्षत
- दीपक
- चंदन
- सिंदूर
- सफेद या पीले रंग के फूल
- छुरी
- गंगाजल
- जल
- घी
- कुशा
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सरस्वती बलिदान की विधि
- सुबह जल्दी उठकर शुद्ध कपड़े पहनकर पूजा के लिए तैयार हो जाएं।
- शुभ मुहूर्त में घर के मंदिर में जाएं।
- मां सरस्वती की स्थापित मूर्ति या प्रतिमा के सामने बैठें।
- अब स्वयं पर और पूजा सामग्री पर गंगाजल का छिड़काव करें। इस दौरान 'ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥' मंत्र का जाप करें।
- हाथ में जल, अक्षत, कुशा और पुष्प लेकर पूजा का संकल्प लें।
- नारियल को चौकी पर स्थापित करें। (नारियल की जगह पेठा या गन्ना भी लिया जा सकता है)
- नारियल पर चंदन, रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। इस दौरान 'ॐ कुष्मांडायै नमः' और 'ॐ महासरस्वत्यै नमः' मंत्र का जाप करें।
- जिस छुरी से आप सात्विक बलि देने वाले हैं, उस पर हल्दी और सिंदूर लगाएं। साथ ही पुष्प अर्पित कर छुरी को प्रणाम करें।
- माता सरस्वती का ध्यान करते हुए ज्ञान की प्राप्ति और अहंकार के नाश की प्रार्थना करें।
- नारियल के एक बार में 2 टुकड़े करें।
- कटे हुए बलि द्रव्य (नारियल) के भागों पर सिंदूर और अक्षत लगाएं।
- अब नारियल को देवी सरस्वती के समक्ष समर्पित करें।
- घी का दीपक जलाने के बाद मां सरस्वती की आरती करें।
- अंत में 'आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरि॥' मंत्र का उच्चारण करते हुए माता रानी से क्षमा याचना करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो लोग चार दिवसीय सरस्वती पूजा में मां सरस्वती की पूजा करते हैं, उनकी बुद्धि का विकास होता है और करियर में सफलता मिलती है। इसके अलावा किसी खास कला को सीखने के लिए भी मां सरस्वती की पूजा करना शुभ रहता है।
मां सरस्वती की आरती
ओम जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता।
सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥
चंद्रवदनी पद्मासिनी, धृति मंगलकारी।
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥ जय…
बाएं कर में वीणा धरे, दाएँ कर माला।
शीश मुकुट मणि सोहे, गले मोतियन माला॥ जय…
देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया।
पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥ जय…
विद्यादायिनी ज्ञान प्रदान कर, ज्ञान का दीप जलाओ।
भ्रम, अज्ञान और अंधकार, जग से दूर भगाओ॥ जय…
धूप, दीप, फल-मेवा, मां स्वीकार करो।
ज्ञान चक्षु दे माता, जग का उद्धार करो॥ जय…
मां सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे।
सुख, समृद्धि, विद्या, भक्ति सहज पावे॥ जय…
जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता।
सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥
जय जय सरस्वती माता। जय...
