Masik Shivratri 2026 Vrat Katha: मासिक शिवरात्रि का दिन शिव जी की उपासना के लिए खास होता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा-पाठ करने से मन शांत होता है तथा व्यक्ति सही रास्ते पर आगे चलता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, आज 9 सितंबर 2026 को भाद्रपद यानी भादो माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जिसके कारण मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जा रहा है। आज के दिन शिव जी और माता पार्वती की पूजा करने के साथ-साथ मासिक शिवरात्रि के दिन से जुड़ी एक प्राचीन कथा भी पढ़ी जाती है, जिसे पढ़ने के बाद ही उपवास को पूर्ण माना जाता है। आज यहां पर आप मासिक शिवरात्रि व्रत की कथा यानी कहानी के बारे में विस्तार से जानेंगे।
मासिक शिवरात्रि व्रत की कथा (Masik Shivratri Vrat Ki Katha)
साहूकार ने बनाया शिकारी को बंदी
प्राचीन काल में चित्रभानु नामक एक शिकारी था, जो जानवरों की हत्या करके अपना और अपने परिवार वालों का पेट भरता था। शिकार से चित्रभानु का खर्चा सही से नहीं चल रहा था, जिसके बाद उसने एक साहूकार से कर्ज लिया। चित्रभानु वक्त पर कर्ज नहीं चुका पाया, जिसके बाद साहूकार ने उसे शिवमठ में बंदी बना लिया।
साहूकार ने शिकारी को छोड़ दिया
साहूकार ने जिस दिन शिकारी को बंदी बनाया था, उस दिन मासिक शिवरात्रि थी। शिकारी ने बंदी बने-बने शिव जी के भजन, आरती, चालीसा और व्रत कथा सुनी। शाम में साहूकार ने शिकारी को जल्द पैसे लौटाने की शर्त पर छोड़ दिया। सुबह से ही शिकारी भूखा था। इसलिए वो जंगल में गया और शिकार खोजने में लग गया।
शिकारी से अनजाने में हुई शिवलिंग की पूजा
शिकार ढूंढते-ढूंढते रात हो गई, लेकिन कुछ नहीं मिला। फिर शिकारी ने जंगल में ही रात बिताने के बारे में सोचा और एक बेल के पेड़ पर चढ़कर सो गया। शिकारी जिस पेड़ पर सोया था, उसके नीचे एक शिवलिंग था, जो बिल्वपत्रों से ढंका हुआ था। सोते समय शिकारी से पेड़ की कुछ टहनियां टूटकर शिवलिंग पर गिर गईं। इस प्रकार दिनभर भूखे रहने के बाद उससे शिवलिंग की पूजा हो गई।
एक हिरणी का शिकार करने वाला था शिकारी
एक पहर रात्रि बीत जाने के बाद जंगल में एक हिरणी आई। शिकारी हिरणी का शिकार करने ही वाला था कि वो इतने में बोल पड़ी 'मैं गर्भिणी हूं। मैं बच्चे को जन्म देकर जल्द तुम्हारे पास आ जाऊंगी। तब तुम मुझे मार लेना।' शिकारी को हिरणी पर दया आ गई और उसने उसे जाने दिया। हिरणी से बात करते समय शिकारी का हाथ कुछ टहनियों पर लगा, जिससे वो टूटकर शिवलिंग पर गिर गईं। इस प्रकार अनजाने में उससे प्रथम प्रहर की पूजा हो गई।
भक्ति टाइम्स पर ये भी पढ़ें- आज है भादो माह की शिवरात्रि, नोट करें पूजा का शुभ मुहूर्त-विधि
इस प्रकार पूरी हुई दूसरे पहर की पूजा
कुछ समय के बाद एक अन्य हिरणी वहां आई, जिसका शिकार शिकारी करने ही वाला था कि वो बोल पड़ी 'मैं अपने पति को ढूंढ रही हूं। मैं उनसे मिलकर आपके पास वापस आ जाऊंगी।' शिकारी ने इस हिरणी को भी जाने दिया। इस दौरान भी शिकारी के हाथ लगने से कुछ टहनियां टूटकर शिवलिंग पर गिर गईं और दूसरे प्रहर की पूजा भी सम्पन्न हो गई।
तीसरे प्रहर की पूजा भी हुई पूरी
कुछ वक्त के बाद एक ओर हिरणी अपने बच्चे के साथ तालाब में पानी पीने के लिए आई, जिस पर शिकारी तीर चलाने ही वाला था कि वो बोल पड़ी 'मेरे साथ मेरा बच्चा है। आप इसे न मारें। मैं इसे अपने पति के हवाले करके आपके पास लौट आऊंगी।' शिकारी ने इस हिरणी को भी जाने दिया, लेकिन भूख लगने के कारण वो व्याकुल होने लगा और वृक्ष पर बैठे-बैठे बेलपत्र तोड़-तोड़कर नीचे फेंकने लगा, जिससे तीसरे प्रहर की पूजा भी इससे पूरी हो गई।
अब हिरणियों का पति बनने वाला था शिकार
कुछ समय के बाद एक हिरण तालाब में पानी पीने के लिए आया। शिकारी ने हिरण को अपना शिकार बनाने का सोचा और उस पर हमला करने लगा, लेकिन तभी हिरण बोल पड़ा 'तुमने यदि मुझसे पहले आने वाली तीन हिरणियों और छोटे-छोटे हिरण के बच्चों को मारा है तो मुझे भी मार दो क्योंकि मैं उनके वियोग को सहन नहीं कर पाऊंगा। मैं उन तीनों हिरणियों का पति हूं। तुमने अगर उन सभी को जीवनदान दिया है तो मुझे भी जाने दो। मैं उनसे मिलकर जल्द तुम्हारे पास आ जाऊंगा।'
पूर्ण हुई मासिक शिवरात्रि की पूजा
शिकारी ने बताया कि उसने किसी का भी शिकार नहीं किया है, जिसके बाद हिरण वहां से तुरंत चला गया और वापस आने का वचन दिया। शिकारी परेशान होकर फिर से पत्तों को तोड़कर नीचे फेंकने लगा, जिससे चौथे प्रहर की पूजा भी पूर्ण हो गई। ऐसे में शिकारी मजबूरन सुबह तक भूखा रहा और अनजाने में शिवलिंग की पूजा भी कर ली।
शिकारी का हुआ हृदय परिवर्तन
मासिक शिवरात्रि व्रत के पूर्ण होने से शिकारी को उसका फल मिला और उसका हृदय निर्मल हो गया। जब हिरण अपनी पत्नियों और बच्चों के साथ वापस आया तो शिकारी ने उन्हें जाने दिया और शिकार छोड़ने का खुद से वचन किया।
