Shardiya Navratri 2026 Day 2 Today (maa brahmacharini puja vidhi shubh muhurat mantra bhog aarti): 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि का आरंभ हो गया है। आज 12 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है, जिसकी पूजा आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन जहां मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की गई। वहीं, आज दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने और व्रत रखने से घर-परिवार में सुख, समृद्धि, धन, वैभव और यश का वास होता है। इसके अलावा कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति मजबूत होती है। आज यहां पर आप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के शुभ मुहूर्त से लेकर विधि के बारे में विस्तार से जानेंगे।
देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप
पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए करीब 1000 वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। उनकी कठोर तपस्या के कारण ही उन्हें ब्रह्मचारिणी नाम मिला। शास्त्रों में माता ब्रह्मचारिणी को पादुकाहीन चरणों और दो भुजाओं के साथ दर्शाया गया है। देवी के दाहिने हाथ में जप माला है, जबकि बाएं हाथ में कमण्डलु सुशोभित है।
देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा का शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:41 बजे से सुबह5:30 बजे तक
- प्रातः संध्या: सुबह 5:06 बजे से सुबह6:20 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:03 बजे से दोपहर2:50 बजे तक
- सायाह्न संध्या: शाम 5:55 बजे से शाम 7:09 बजे तक
- अमृत काल: दोपहर 2:35 बजे से दोपहर 4:16 बजे तक
देवी ब्रह्मचारिणी की प्रिय चीजें
- प्रिय पुष्प-
- प्रिय रंग-
- प्रिय फल-
- प्रिय भोग-
- प्रिय मंत्र-
- प्रार्थना-
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
- स्तुति-
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
- ध्यानम्-
जपमाला कमण्डलु धरा ब्रह्मचारिणी शुभाम्॥
गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालङ्कार भूषिताम्॥
परम वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोला पीन।
पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥
- स्तोत्रम्-
ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥
शङ्करप्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी।
शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥
- कवचम्-
अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्धरी च कपोलो॥
पञ्चदशी कण्ठे पातु मध्यदेशे पातु महेश्वरी॥
षोडशी सदापातु नाभो गृहो च पादयो।
अङ्ग प्रत्यङ्ग सतत पातु ब्रह्मचारिणी।
मां ब्रह्मचारिणी की आरती
जय अंबे ब्रह्मचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो।।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सकल संसारा।।
जय गायत्री वेद की माता। जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।।
कमी कोई रहने न पाए। कोई भी दुख सहने न पाए।।
उसकी विरति रहे ठिकाने। जो तेरी महिमा को जाने।।
रुद्राक्ष की माला ले कर। जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।।
आलस छोड़ करे गुणगाना। मां तुम उसको सुख पहुंचाना।।
ब्रह्मचारिणी तेरो नाम। पूर्ण करो सब मेरे काम।।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी। रखना लाज मेरी महतारी।।
भक्ति टाइम्स पर ये भी पढ़ें- नवरात्रि व्रत के बीच आ जाएं पीरियड्स तो क्या करें? जानें इससे जुड़े जरूरी नियम और मान्यताएं
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि
आज सुबह जल्दी उठने के बाद स्नान आदि कार्य करने के पश्चात सफेद या हल्के रंग के शुद्ध कपड़े धारण करें। अब घर के मंदिर में जाएं। वहां मां दुर्गा की मूर्ति के साथ देवी ब्रह्मचारिणी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। मां दुर्गा और देवी शैलपुत्री का ध्यान करने के बाद देवी ब्रह्मचारिणी का स्मरण करें। पूजा और व्रत का संकल्प लें। देवी को रोली, अक्षत, फल, फूल और भोग अर्पित करें। इस दौरान मंत्र जाप करें और प्रार्थना, स्तोत्रम्, कवचम्, चालीसा और ध्यानम् पढ़ें।
घी का दीपक जलाने के पश्चात नवरात्रि के दूसरे दिन के व्रत की कथा पढ़ें। आरती करके पूजा का समापन करें। शाम में फिर से देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करें, जिसके बाद आप अपने व्रत का पारण कर सकते हैं।
