Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व मां दुर्गा और उनके 9 स्वरूपों को समर्पित है। इन 9 दिनों में मां दुर्गा के देवी शैलपुत्री, देवी ब्रह्मचारिणी, देवी चंद्रघंटा, देवी कूष्मांडा, देवी स्कंदमाता, देवी कात्यायिनी, देवी कालरात्रि, देवी महागौरी तथा देवी सिद्धिदात्री स्वरूपों की पूजा की जाती है। साथ ही व्रत रखने और हवन करने का विधान है। हालांकि, आज 18 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि की सप्तमी और अष्टमी दोनों तिथियों का संयोग बन रहा है। ऐसे में कन्फ्यूजन लगातार बनी हुई है कि आज मां दुर्गा के 7वें स्वरूप देवी कालरात्रि की पूजा होगी या 8वें स्वरूप मां महागौरी का पूजन होगा।
आज की तिथि का गणित
द्रिक पंचांग के अनुसार, आज 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 8 बजकर 28 मिनट तक आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि थी, जिसके बाद अब आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि प्रभावी है। कल 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजकर 52 मिनट तक आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि रहेगी। उदया तिथि की मानें तो आज 18 अक्टूबर 2026, रविवार को शारदीय नवरात्रि की सप्तमी तिथि है।
आज कौन सी देवी की पूजा होगी?
शारदीय नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर देवी कालरात्रि की पूजा की जाती है। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, आज 18 अक्टूबर 2026 को मां दुर्गा के 7वें स्वरूप देवी कालरात्रि की पूजा होगी। बता दें कि महागौरी मां दुर्गा का 8वां स्वरूप है, जिनकी पूजा नवरात्रि के 8वें दिन होती है।
देवी कालरात्रि का स्वरूप
देवी कालरात्रि मां दुर्गा का उग्र स्वरूप है, जो उन्होंने रक्तबीज राक्षस का वध करने के लिए लिया था। देवी कालरात्रि को वाहन गधे पर 4 भुजाओं के साथ दर्शाया गया है। मां का एक दाहिना हाथ वरद मुद्रा में है, जबकि दूसरा दाहिना हाथ अभय मुद्रा में है। बाएं हाथों की बात करें तो एक हाथ में लोहे का घातक अंकुश है, जबकि दूसरे हाथ में तलवार सुशोभित है।
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देवी कालरात्रि की पूजा का शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:43 बजे से लेकर 5:33 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से लेकर दोपहर 12:29 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:49 बजे से लेकर 6:14 बजे तक
- सायाह्न संध्या: शाम 5:49 बजे से लेकर 7:04 बजे तक
- अमृत काल: सुबह 7:24 बजे से लेकर 9:12 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: रात 11:41 बजे से लेकर मध्य रात्रि 12:32 बजे तक
देवी कालरात्रि की पूजा विधि
शुभ मुहूर्त से पहले गहरे नीले रंग के कपड़े पहनकर पूजा के लिए तैयार हो जाएं। अब घर के मंदिर में गंगाजल का छिड़काव करें, जिससे वो स्थान पवित्र हो जाए। इसके बाद मां दुर्गा की मूर्ति के पास लाल कंबल के आसन पर कालरात्रि माता की तस्वीर की स्थापना करें। व्रत का संकल्प लेने के बाद मां दुर्गा का स्मरण करते हुए माता रानी को रोली, अक्षत, रात की रानी का फूल, वस्त्र और श्रृंगार का सामान अर्पित करें। साथ ही गुड़ से बनी किसी मिठाई का भोग लगाएं। अब 'ॐ देवी कालरात्र्यै नमः' मंत्र का 11 बार जाप करें। घी का दीपक जलाने के बाद शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन की व्रत कथा पढ़ें। अंत में आरती करके पूजा का समापन करें।
