Diwali 2026: दीपावली के महापर्व को लेकर इस वर्ष तिथियों का एक विशेष संयोग बन रहा है, जिसके कारण छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली की तारीखों को लेकर लोगों के मन में संशय की स्थिति बनी हुई थी। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस बार चतुर्दशी और अमावस्या तिथि के एक साथ होने के कारण दोनों प्रमुख पर्व एक ही दिन मनाए जाएंगे।
इस वर्ष तिथियों का अद्भुत मेल देखने को मिल रहा है। छोटी दिवाली, जिसे नरक चतुर्दशी या रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है, का विधान चतुर्दशी तिथि में होता है। वहीं, बड़ी दिवाली के लिए शास्त्र सम्मत नियम यह है कि इसे उस दिन मनाया जाना चाहिए जब प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में अमावस्या तिथि व्याप्त हो।
8 नवंबर को ही मनाई जाएगी छोटी और बड़ी दिवाली
8 नवंबर को दोपहर 11 बजकर 30 मिनट से अमावस्या तिथि का आरंभ हो रहा है, जो 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगी। चूंकि दिवाली पूजन का मुख्य समय प्रदोष काल में होता है, इसलिए 8 नवंबर को ही दिवाली मनाना शास्त्र सम्मत माना गया है। इसी प्रकार, छोटी दिवाली के लिए भी 8 नवंबर की तिथि ही निर्धारित की गई है, क्योंकि चतुर्दशी का संयोग इसी दिन बन रहा है।
छोटी दिवाली से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था। नरकासुर ने अपनी शक्तियों के माध्यम से 16 हजार स्त्रियों को बंदी बना लिया था, जिससे चारों ओर हाहाकार मचा हुआ था। देवताओं और ऋषियों की प्रार्थना पर भगवान कृष्ण ने नरकासुर का अंत कर सभी को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। मान्यता है कि जिस दिन नरकासुर का वध हुआ था, उस दिन चतुर्दशी तिथि थी। इसी विजय की खुशी में दीप जलाकर उत्सव मनाया गया, जिसे आज हम नरक चतुर्दशी के रूप में जानते हैं।
