भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक भाई दूज का त्योहार इस वर्ष कब मनाया जाएगा, इसे लेकर लोगों के मन में तारीख को लेकर दुविधा बनी हुई है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 10 और 11 नवंबर दोनों दिन पड़ रही है, जिसके कारण सही तिथि को लेकर चर्चाएं हो रही हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस पर्व को गोवर्धन पूजा के अगले दिन मनाया जाता है।
पंचांग में कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि का आरंभ 10 नवंबर, मंगलवार को दोपहर 2 बजकर 1 मिनट पर हो रहा है। यह तिथि अगले दिन यानी 11 नवंबर, बुधवार को दोपहर 3 बजकर 54 मिनट तक रहेगी। चूंकि 11 नवंबर को सूर्योदय के समय द्वितीया तिथि व्याप्त है, इसलिए उदया तिथि की मान्यता के अनुसार भाई दूज का त्योहार 11 नवंबर, बुधवार को ही मनाया जाना शास्त्र सम्मत है।
भाई दूज का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
शास्त्रों में भाई दूज के दिन दोपहर के समय भाई को तिलक लगाना सबसे उत्तम माना गया है। पूजा के लिए सबसे पहले स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा के दौरान भाई का मुख पूर्व दिशा की ओर और बहन का मुख पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए। शुभ मुहूर्त में पूजा की शुरुआत करें और भाई को आसन पर बिठाकर तिलक लगाएं।
तिलक लगाने की परंपरा के बारे में मान्यता है कि छोटे भाई को अंगूठे से और बड़े भाई को अनामिका उंगली (अंगूठे के पास वाली उंगली) से दीपशिखा की तरह तिलक लगाना चाहिए। तिलक के बाद भाई की गोद में नारियल रखें और उन्हें भोजन कराएं। इसके पश्चात भाई अपनी बहनों को वस्त्र या अन्य उपहार भेंट करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस विधि से पूजा करने और भाई को भोजन कराने से उनकी आयु और बल में वृद्धि होती है, साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
भाई दूज के दिन शुभ चौघड़िया मुहूर्त का विशेष महत्व है। पूजा के लिए लाभ चौघड़िया सुबह 6:40 से 8:01 बजे तक, अमृत चौघड़िया सुबह 8:01 से 9:22 बजे तक और शुभ चौघड़िया सुबह 10:43 से दोपहर 12:05 बजे तक उपलब्ध रहेगा। इन मुहूर्त में पूजा करना शुभ माना जाता है।
