धनतेरस का पर्व दिवाली के महापर्व की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजा का विशेष विधान है। परंपरा के अनुसार, इस दिन सोना-चांदी, नए बर्तन और झाड़ू जैसी वस्तुएं खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ये वस्तुएं घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य लाती हैं। हालांकि, कई लोगों के मन में यह जिज्ञासा रहती है कि इन खरीदी गई वस्तुओं का पूजन कैसे करें और इनका सही उपयोग क्या है।
ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, धनतेरस पर घर लाई गई हर वस्तु का अपना महत्व है और उन्हें विधि-विधान से पूजा स्थल पर स्थान देना चाहिए। इन वस्तुओं को घर में रखने और उनके उपयोग से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण नियम हैं, जिनका पालन करना शुभ माना जाता है।
शुभ वस्तुओं की पूजा और उपयोग के नियम
धनतेरस पर खरीदी गई झाड़ू को घर में लाने के बाद किसी साफ स्थान पर रखें। मान्यता है कि इससे दरिद्रता दूर होती है। पूजा के दौरान आप झाड़ू पर हल्दी या कुमकुम से स्वास्तिक बना सकते हैं। इसे पूजा स्थल के ठीक सामने रखने के बजाय किसी सुरक्षित और साफ जगह पर जमीन के समानांतर रखें। ध्यान रखें कि झाड़ू को लांघना नहीं चाहिए।
पीतल और स्टील के बर्तनों को घर लाने के बाद सबसे पहले उन्हें अच्छी तरह साफ करें। पूजा के समय इन बर्तनों पर हल्दी, कुमकुम और अक्षत अर्पित कर इनका पूजन करें। पीतल के बर्तनों का उपयोग अगले दिन यानी छोटी दिवाली से करना अधिक उचित माना जाता है। पूजा के बाद इन्हें रसोई में व्यवस्थित स्थान पर रखें।
चांदी के सिक्के का विशेष महत्व है। पूजा की चौकी पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाकर सिक्के को रखें और उस पर हल्दी, कुमकुम व पुष्प अर्पित करें। इस दौरान 'ओम श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। पूजा के बाद सिक्के को तिजोरी या धन रखने के स्थान पर सुरक्षित रख दें।
साबुत धनिया को धन-धान्य का प्रतीक माना जाता है। इसे एक पात्र में रखकर माता लक्ष्मी को अर्पित करें और दिवाली की पूजा तक पूजा स्थल पर ही रहने दें। इसके बाद इसे रसोई में सुरक्षित रखें या कई लोग इसे गमले में बोने की परंपरा का भी पालन करते हैं।
धनतेरस की शाम को प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजा करें। सभी नई वस्तुओं को एक चौकी पर रखकर उन पर तिलक लगाएं और दीपक जलाकर परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। पूजा संपन्न होने के बाद इन वस्तुओं को उनके निर्धारित उपयोग के अनुसार उचित स्थान पर रख देना चाहिए।
