आज 3 अक्टूबर 2026, शनिवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। पंचांग के अनुसार, आज आश्विन कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि सुबह 07:59 बजे तक रही, जिसके बाद अष्टमी तिथि का आरंभ हो गया है। यह अष्टमी तिथि अगले दिन यानी 4 अक्टूबर को तड़के 05:51 बजे तक प्रभावी रहेगी। चलिए पंचांग से जानें आज 3 अक्टूबर के दिन की पूरी ज्योतिषीय गणना के बारे में।
आज के व्रत-त्योहार
- तृतीय चातुर्मास का 11वां और 12वां दिन
- अष्टमी श्राद्ध
- महालक्ष्मी व्रत का समापन
- जीवित्पुत्रिका व्रत
- कालाष्टमी व्रत
- मासिक कृष्ण जन्माष्टमी
चंद्र और सूर्य ग्रह की स्थिति
आज के दिन चंद्रमा दिन-रात मिथुन राशि में संचार करेंगे। सूर्य देव वर्तमान में कन्या राशि में स्थित हैं और दक्षिणायन व शरद ऋतु का प्रभाव बना हुआ है।
नक्षत्र
नक्षत्रों की बात करें तो आर्द्रा नक्षत्र अगले दिन मध्यरात्रि के बाद 01:29 बजे तक रहेगा, जिसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र का प्रवेश होगा।
आज के शुभ मुहूर्त
धार्मिक कार्यों और महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए शुभ समय का चुनाव करना आवश्यक होता है। आज अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:46 बजे से 12:34 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, अमृत काल का समय सायं 04:05 बजे से 05:35 बजे तक निर्धारित है। दिन के चौघड़िया मुहूर्त में सुबह 07:44 से 09:12 बजे तक का समय 'शुभ' माना गया है।आज के अशुभ मुहूर्त
वहीं, पंचांग के अनुसार कुछ समय ऐसे भी होते हैं जिन्हें शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है। आज राहुकाल सुबह 09:00 बजे से 10:30 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त, गुलिक काल सुबह 06:00 बजे से 07:30 बजे तक और यमगंड दोपहर 01:30 बजे से 03:30 बजे तक रहेगा। इन समय अवधियों के दौरान किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य को शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।
चन्द्र वास से लेकर कुंभ चक्र तक
- चन्द्र वास- पश्चिम दिशा में
- राहु वास- पूर्व दिशा में
- दिशा शूल- पूर्व
- कुम्भ चक्र- गर्भ में सुबह 01:29 बजे तक। इसके बाद वो तल पर वास करेंगे।
महालक्ष्मी व्रत समापन और विशेष उपाय
आज महालक्ष्मी व्रत का समापन हो रहा है। 15 दिनों तक चलने वाले इस व्रत के पूर्ण होने पर श्रद्धालु माता लक्ष्मी की विशेष आराधना करते हैं। शनिवार का दिन होने के कारण आज भगवान शनिदेव की पूजा का भी विशेष महत्व है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज के दिन माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। साथ ही, शनिदेव की प्रसन्नता के लिए पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना गया है। आज सूर्योदय सुबह 06:15 बजे और सूर्यास्त सायं 06:05 बजे होगा। चंद्रोदय रात्रि 11:32 बजे और चंद्रास्त अगले दिन दोपहर 01:04 बजे होगा।
