दिवाली का त्योहार सुख, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घरों की विशेष साफ-सफाई की जाती है और उन्हें दीपों व सजावट से संवारा जाता है। इन तैयारियों में घर के मुख्य द्वार पर बंधनवार यानी तोरण लगाना अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, मुख्य द्वार घर का सबसे प्रमुख ऊर्जा स्रोत होता है, जहाँ से सकारात्मक ऊर्जा और मां लक्ष्मी का प्रवेश होता है।
वास्तु के अनुसार, तोरण केवल सजावट की वस्तु नहीं है, बल्कि यह घर के वास्तु संतुलन को बनाए रखने का एक वैदिक माध्यम भी है। अनजाने में लगाई गई गलत तरह की बंधनवार घर में वास्तु दोष उत्पन्न कर सकती है। इसलिए, इस दिवाली तोरण का चयन करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना आवश्यक है ताकि घर में सुख-समृद्धि का वास हो सके।
तोरण चयन और लगाने के वास्तु नियम
वास्तु शास्त्र के अनुसार, प्लास्टिक या सिंथेटिक फूलों से बने तोरणों का उपयोग करने से बचना चाहिए। ये देखने में आकर्षक लग सकते हैं, लेकिन इन्हें निर्जीव माना जाता है जो नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकते हैं। इसी तरह, काले धागे, लोहे के तार या तीखे किनारों वाले तोरण भी घर के लिए शुभ नहीं माने जाते। यदि आप घर में तोरण लगा रहे हैं, तो सूखे या मुरझाए पत्तों का प्रयोग न करें, क्योंकि ये दरिद्रता का प्रतीक माने जाते हैं।
बाजार में मिलने वाले देवी-देवताओं के चित्र वाले तोरणों से भी परहेज करना चाहिए। दरवाजे के बार-बार खुलने और बंद होने से इनका अनादर होने की संभावना रहती है। इसके अलावा, यदि तोरण में लगी कौड़ी, मोती या घंटी टूटी हुई हो, तो उसे कभी न लगाएं। तोरण को दरवाजे पर इतनी ऊंचाई पर लगाएं कि वह आते-जाते लोगों के सिर से न टकराए, क्योंकि यह सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह में बाधा डाल सकता है। साथ ही, मुख्य द्वार के पास जूते-चप्पल या कूड़ेदान रखने से बचना चाहिए।
शुभ और सकारात्मक ऊर्जा वाले तोरण
वास्तु के अनुसार, आम या अशोक के ताजे पत्तों से बना तोरण सबसे शुभ माना जाता है। इनकी सुगंध और रंग नकारात्मक शक्तियों को दूर रखने में सहायक होते हैं। इन्हें गेंदे के फूलों के साथ सजाना और भी उत्तम है। यदि आप लंबे समय तक चलने वाला तोरण चाहते हैं, तो कौड़ी, सीप और मोतियों से बना बंधनवार चुन सकते हैं, क्योंकि ये मां लक्ष्मी को प्रिय हैं और धन को आकर्षित करते हैं।
इसके अतिरिक्त, कलावा या लाल सूती धागे में पिरोए गए तोरण पर हल्दी और सिंदूर का टीका लगाना शुभ होता है। पीतल या तांबे की छोटी घंटियों वाला तोरण भी बहुत उत्तम माना जाता है, क्योंकि इनकी मधुर ध्वनि वास्तु दोषों को दूर करने में सहायक होती है। तोरण लगाते समय ध्यान रखें कि वह दोनों चौखटों को स्पर्श करे और उसे कलावा या कच्चे सूत से ही बांधें। अंत में, चौखट को गंगाजल मिश्रित जल से शुद्ध करने के बाद ही तोरण लगाएं और उसके दोनों सिरों पर रोली-हल्दी से स्वस्तिक या शुभ-लाभ अंकित करें।
