Kitchen Vastu Tips: भारतीय परंपरा में रसोई को अग्नि तत्व से जोड़कर देखा जाता है और इसी वजह से वास्तु शास्त्र में इसकी दिशा और बनावट को काफी अहम माना गया है। माना जाता है कि रसोई सही दिशा में हो और खाना बनाते समय कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो घर का माहौल सकारात्मक बना रहता है। आइए जानते हैं रसोई और खाना बनाने की दिशा से जुड़े कुछ प्रमुख वास्तु नियम।
खाना बनाते समय किस दिशा में होना चाहिए मुंह?
वास्तु शास्त्र में पूर्व दिशा की ओर मुंह करके खाना बनाना सबसे शुभ माना जाता है। पूर्व दिशा को सूर्य से जुड़ी दिशा माना जाता है और परंपरा में इसे ऊर्जा और सकारात्मकता से जोड़ा जाता है। वास्तु की मान्यता के अनुसार, अगर किचन में चूल्हे की ऐसी व्यवस्था हो कि खाना बनाते समय व्यक्ति का चेहरा पूर्व दिशा की तरफ रहे, तो इसे घर के लिए अच्छा माना जाता है।
रसोई के लिए कौन-सी दिशा मानी जाती है शुभ
वास्तु शास्त्र में दक्षिण-पूर्व दिशा यानी आग्नेय कोण को रसोई के लिए खास माना जाता है। इसका संबंध अग्नि तत्व से बताया जाता है। अगर किसी घर में दक्षिण-पूर्व दिशा में किचन बनाना संभव हो तो इसे वास्तु के हिसाब से अच्छा विकल्प माना जाता है। दक्षिण-पूर्व संभव न होने पर कई वास्तु परंपराओं में उत्तर-पश्चिम दिशा को भी रसोई के लिए विकल्प माना जाता है।
सिंक और चूल्हे को रखें अलग
रसोई में आग और पानी दोनों प्रमुख तत्व होते हैं। वास्तु की मान्यता में इन दोनों को एक-दूसरे के बिल्कुल पास रखने से बचने की सलाह दी जाती है। इसलिए कोशिश करें कि गैस स्टोव और सिंक के बीच थोड़ा अंतर रहे। इससे वास्तु संबंधी मान्यता के अलावा रसोई को व्यवस्थित और इस्तेमाल करने में भी आसानी रहती है।
रसोई की सफाई का रखें खास ध्यान
वास्तु में साफ-सफाई को भी काफी महत्व दिया जाता है। गंदा या लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद साफ न किया गया गैस स्टोव रसोई को अव्यवस्थित बना सकता है। इसलिए खाना बनाने के बाद चूल्हे और आसपास के प्लेटफॉर्म को साफ रखना बेहतर है।
मुख्य दरवाजे से चूल्हा सीधे दिखाई न दे
कुछ वास्तु मान्यताओं के अनुसार रसोई का चूल्हा घर के मुख्य दरवाजे से सीधे दिखाई देना अच्छा नहीं माना जाता। अगर घर की बनावट ऐसी है कि गैस स्टोव सामने ही दिखाई देता है तो पर्दे, पार्टिशन या उचित किचन डिजाइन की मदद से इसे थोड़ा अलग किया जा सकता है।
