Bhoomi Pujan Vidhi: जब भी कोई व्यक्ति नया घर, दुकान या किसी तरह का भवन बनाने की शुरुआत करता है, तो सबसे पहले भूमि पूजन करने की परंपरा है। माना जाता है कि जिस जमीन पर निर्माण होने वाला है, वहां पूजा करने से पृथ्वी माता और देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। इससे निर्माण कार्य बिना किसी बड़ी रुकावट के पूरा होने की कामना की जाती है। भूमि पूजन से पहले किन बातों का ध्यान रखें? भूमि पूजन के लिए कौन सी दिशा शुभ मानी जाती है? भूमि पूजन की सामान्य विधि क्या है? आइए जानते हैं।
भूमि पूजन से पहले इन बातों का रखें ध्यान
भूमि पूजन से पहले प्लॉट की अच्छी तरह सफाई कर लें। वहां कूड़ा-कचरा या अनावश्यक सामान नहीं होना चाहिए। इसके बाद पूजा के लिए साफ जगह तैयार करें। शुभ तिथि और मुहूर्त का चुनाव परिवार की परंपरा और पंचांग के अनुसार किया जाता है। पूजा के समय परिवार के सदस्यों को साफ कपड़े पहनकर शामिल होना चाहिए।
भूमि पूजन के लिए कौन सी दिशा मानी जाती है शुभ
वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण को काफी शुभ माना जाता है। भूमि पूजन के लिए पूजा स्थल चुनते समय इस दिशा को प्राथमिकता दी जा सकती है। हालांकि जमीन की स्थिति, आकार और निर्माण की योजना के हिसाब से सही स्थान तय करना बेहतर होता है। इसके लिए वास्तु विशेषज्ञ के साथ-साथ आर्किटेक्ट या इंजीनियर की सलाह भी ली जा सकती है।
भगवान गणेश की पूजा से करें शुरुआत
किसी भी शुभ काम से पहले भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। भूमि पूजन में भी सबसे पहले गणेश जी का ध्यान किया जाता है। गणेश जी को फूल, दूर्वा, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित की जाती है। मान्यता है कि गणेश जी की पूजा करने से कार्य में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और शुभ शुरुआत होती है।
भूमि पूजन में किन चीजों की जरूरत पड़ती है
भूमि पूजन की सामग्री परिवार और परंपरा के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है। आम तौर पर पूजा के लिए रोली, अक्षत, फूल, माला, धूप, दीपक, कपूर, कलश, नारियल, आम के पत्ते, फल, मिठाई, पंचामृत, सुपारी, पान, मौली और गंगाजल जैसी चीजें रखी जाती हैं। कई जगहों पर वास्तु पूजा के लिए अलग सामग्री भी शामिल की जाती है।
भूमि पूजन की सामान्य विधि क्या है
सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करके वहां चौकी या पूजा का स्थान तैयार किया जाता है। इसके बाद गणेश जी का पूजन किया जाता है। फिर कलश स्थापना और संकल्प किया जाता है। पूजा के दौरान पृथ्वी माता, वास्तु देवता और अन्य देवी-देवताओं का आह्वान किया जाता है। इसके बाद भूमि पर अक्षत, फूल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित की जाती है। कई परंपराओं में शुभ मुहूर्त में भूमि के एक निर्धारित हिस्से में प्रतीकात्मक रूप से पहली खुदाई की जाती है। इसके बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जाता है। पूजा की विस्तृत विधि क्षेत्र, कुल परंपरा और पुरोहित की बताई विधि के अनुसार अलग हो सकती है।
