घर बनाते समय ज्यादातर लोग कमरे की जगह पर ही काफी ध्यान देते हैं लेकिन घर की दो बेहद जरूरी जगहें यानी किचन और बाथरूम के बीच की स्थिति पर कम लोगों का ही ध्यान जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन और बाथरूम को एक-दूसरे से अलग रखना अच्छा माना जाता है। मान्यताओं के मुताबिक किचन में अग्नि तत्व का प्रभाव माना जाता है, जबकि बाथरूम को पानी और नमी से जुड़ा स्थान माना जाता है। ऐसे में अगर दोनों के बीच सही दूरी या व्यवस्था न हो, तो इसे वास्तु दोष से जोड़कर देखा जाता है।
किचन और बाथरूम आमने-सामने होना
वास्तु के हिसाब से किचन और बाथरूम के दरवाजे बिल्कुल आमने-सामने होना अच्छा नहीं है। ऐसा होने पर दोनों स्थानों की अलग-अलग ऊर्जाओं का टकराव होने की मान्यता है। दोनों दरवाजों के बीच उचित दूरी और अलगाव रखने की कोशिश करें। बाथरूम का दरवाजा हमेशा बंद रखने की आदत भी अच्छी मानी जाती है।
किचन की दीवार से लगी हो बाथरूम की दीवार
वास्तु मान्यताओं में किचन की दीवार से लगी हुई बाथरूम की दीवार को भी आदर्श स्थिति नहीं माना जाता। इसे वास्तु दोष से जोड़ा जाता है। संभव हो तो चूल्हे की जगह ऐसी रखें कि वह सीधे बाथरूम की दीवार से न लगी हो।
किचन के पास बाथरूम का दरवाजा हो तो क्या करें?
वास्तु में छोटे-छोटे बदलावों के जरिए स्थिति को संतुलित किया जा सकता है। सबसे पहले बाथरूम को साफ और सूखा रखें। पानी जमा न होने दें। बाथरूम का दरवाजा इस्तेमाल के बाद बंद रखें और किचन को भी हमेशा साफ-सुथरा रखने की कोशिश करें।
घर बनाते समय इस बात का रखें ध्यान
अगर आप नया घर बनवा रहे हैं या मकान में बदलाव करवा रहे हैं, तो किचन और बाथरूम की जगह पहले से सोच-समझकर तय करें। दोनों के दरवाजों की दिशा, चूल्हे की स्थिति, पानी की निकासी और वेंटिलेशन पर ध्यान देना चाहिए।
नोट - ध्यान रखें कि वास्तु के ये नियम पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें अपनाते समय घर की वास्तविक जरूरत, सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देना सबसे जरूरी है।
