नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। दिवाली से ठीक एक दिन पहले मनाए जाने वाले इस त्योहार का हिंदू धर्म में खास महत्व है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर अभ्यंग स्नान करने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। नरक चतुर्दशी को भगवान श्रीकृष्ण और राक्षस नरकासुर से जुड़ी पौराणिक कथा के लिए भी याद किया जाता है। इसके अलावा इस दिन हनुमान जी की पूजा और शाम को दीपक जलाने का भी विशेष महत्व है। आइए जानते हैं छोटी दिवाली कब मनाई जाएगी, अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त क्या है और इस दिन कौन-कौन सी परंपराएं निभाई जाती हैं।
नरक चतुर्दशी 2026 कब मनाई जाएगी?
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। साल 2026 में यह पर्व रविवार, 8 नवंबर को मनाया जाएगा। इसे रूप चौदस, काली चौदस और छोटी दिवाली जैसे नामों से भी जाना जाता है। इस दिन घरों में सुबह से ही त्योहार की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। लोग जल्दी उठकर स्नान करते हैं, घर की साफ-सफाई करते हैं और शाम को दीपक जलाकर छोटी दिवाली मनाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन कुछ खास परंपराओं को निभाने से घर में सुख-शांति और खुशहाली आती है।
नरक चतुर्दशी 2026 अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त
छोटी दिवाली पर अभ्यंग स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन सूर्योदय से पहले शरीर पर तेल लगाकर स्नान करने की परंपरा है। साल 2026 में अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त सुबह 5:41 बजे से 6:38 बजे तक रहेगा। मान्यता है कि इस समय स्नान करने से व्यक्ति को नकारात्मकता से छुटकारा मिलता है और जीवन में सकारात्मकता आती है। कई जगहों पर इस दिन उबटन लगाकर स्नान करने की भी परंपरा है। इसे शरीर और मन की शुद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
क्या है अभ्यंग स्नान का महत्व
अभ्यंग स्नान का मतलब है तेल लगाकर स्नान करना। छोटी दिवाली के दिन इसे सिर्फ शरीर की सफाई से जोड़कर नहीं देखा जाता, बल्कि इसके पीछे धार्मिक मान्यता भी है। कहा जाता है कि इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान करने वाले व्यक्ति को यमराज के भय से मुक्ति मिलती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान करने से पुराने पापों का प्रभाव कम होता है और व्यक्ति को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। यही वजह है कि कई परिवारों में पीढ़ियों से छोटी दिवाली की सुबह अभ्यंग स्नान करने की परंपरा चली आ रही है।
नरक चतुर्दशी पर क्यों की जाती है हनुमान जी की पूजा?
छोटी दिवाली पर हनुमान जी की पूजा का भी खास महत्व माना जाता है। खासतौर पर काली चौदस के अवसर पर बजरंगबली की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि हनुमान जी अपने भक्तों को बुरी शक्तियों और नकारात्मक प्रभावों से बचाते हैं। इस दिन भक्त हनुमान जी को सिंदूर, चमेली का तेल और फूल अर्पित करते हैं। इसके अलावा बूंदी या लड्डू का भोग लगाया जाता है। कई लोग हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ भी करते हैं। माना जाता है कि सच्चे मन से बजरंगबली की पूजा करने से डर दूर होता है और व्यक्ति को मुश्किलों का सामना करने की हिम्मत मिलती है।
छोटी दिवाली पर दीपक जलाने की परंपरा
नरक चतुर्दशी की शाम को घर के बाहर और अलग-अलग जगहों पर दीपक जलाए जाते हैं। कुछ परिवारों में यमराज के नाम से दक्षिण दिशा में दीपक रखने की परंपरा भी है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से सुरक्षा मिलती है। इसके अलावा घर के मुख्य दरवाजे, आंगन और पूजा स्थल पर दीपक जलाकर खुशहाली की कामना की जाती है।
क्यों मनाई जाती है नरक चतुर्दशी?
पौराणिक कथा के अनुसार, नरकासुर नाम का एक शक्तिशाली राक्षस था, जिसने अपने अत्याचारों से देवताओं और आम लोगों को परेशान कर रखा था। उसने कई राजाओं की कन्याओं को भी बंदी बना लिया था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध करके उसके आतंक से सभी को मुक्ति दिलाई थी। इसी खुशी में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। यह पर्व हमें संदेश देता है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में जीत अच्छाई की ही होती है। छोटी दिवाली का यही संदेश इसे दीवाली के त्योहारों में खास बनाता है।
