व्रत त्योहार

लड्डू गोपाल की छठी: जानिए पूजा विधि, भोग और नामकरण का महत्व

जन्माष्टमी के छह दिन बाद लड्डू गोपाल की छठी मनाई जाती है। इस दिन बाल स्वरूप कान्हा का विशेष श्रृंगार, नामकरण और कढ़ी-चावल का भोग लगाने की परंपरा है। जानें संपूर्ण पूजा विधि।

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जन्माष्टमी के पावन पर्व के छह दिन बाद लड्डू गोपाल की छठी मनाई जाती है। सनातन परंपरा में लड्डू गोपाल को घर के एक छोटे सदस्य की तरह माना जाता है, इसलिए उनके जन्म के बाद छठी का उत्सव भी पूरे विधि-विधान और हर्षोल्लास के साथ संपन्न किया जाता है। इस वर्ष लड्डू गोपाल की छठी 9 सितंबर, बुधवार को मनाई जाएगी।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिशु के जन्म के छठे दिन शुद्धि संस्कार किया जाता है, उसी परंपरा का पालन करते हुए भक्त अपने आराध्य बाल गोपाल की सेवा करते हैं। इस दिन विशेष रूप से कान्हा का श्रृंगार किया जाता है और उन्हें विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।