Palmistry: हस्तरेखा शास्त्र एक प्राचीन विद्या है, जिसमें हथेली पर मौजूद विभिन्न निशानों का उल्लेख है। इसमें शुभ और अशुभ निशानों के बारे में अलग-अलग बताया गया है। शुभ निशान जहां जीवन में सकारात्मकता लाते हैं। वहीं, अशुभ निशानों के कारण व्यक्ति को भाग्य का साथ नहीं मिलता है। हालांकि, कुछ स्थितियों में शुभ माने जाने वाले निशान भी अशुभ परिणाम देते हैं। चलिए हस्तरेखा शास्त्र की मदद से ऐसे ही 4 निशानों के बारे में जानें, जो शुभ होने के बावजूद अशुभ फल देते हैं।
तारा (Star Sign):
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, रिंग फिंगर के ठीक नीचे तारा बनना शुभ होता है। ऐसा व्यक्ति जीवन में अपार धन कमाता है और समाज हित के लिए बढ़-चढ़कर काम करता है। वहीं, रिंग फिंगर के अलावा अन्य उंगलियों के नीचे तारे का निशान बनना शुभ नहीं होता है। ऐसा व्यक्ति आएदिन किसी न किसी परेशानी में फंस जाता है व गंभीर बीमारियों का शिकार होता है।
क्रॉस (Cross Sign):
तर्जनी उंगली के ठीक नीचे क्रॉस का निशान बनना शुभ होता है। ऐसे लोगों की धर्म में अच्छी-खासी रुचि होती है। इन लोगों का वैवाहिक जीवन हर स्थिति में खुशियों से भरा रहता है। वहीं, हथेली के बीच में क्रॉस का निशान बनना शुभ नहीं होता है। इसे दुर्घटना का प्रतीक माना जाता है। ऐसा व्यक्ति न तो अपने करियर से संतुष्ट होता है और न प्रेम जीवन से।
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द्वीप (Island Sign):
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, हथेली के बीच में द्वीप का निशान बनना शुभ होता है, जबकि उंगलियों के पास इसका बनना शुभ नहीं होता है। जिन लोगों की उंगलियों के पास द्विप का निशान बनता है, उनका बीमारियों से अक्सर पीछा नहीं छूटता है। साथ ही ये ज्यादा समय तक खुश नहीं रह पाते हैं। कोई न कोई परेशानी आएदिन इनके सामने आ ही जाती है। इसके अलावा इन्हें अपने प्रेमी व जीवनसाथी का भी अधिक सहयोग नहीं मिलता है।
चक्र (circle):
हथेली के बीच में चक्र का निशान बनना शुभ होता है। ऐसे लोग अपनी मेहनत से जीवन में अपार मान-सम्मान कमाते हैं। साथ ही पैसों की कमी का सामना इन्हें नहीं करना पड़ता है। वहीं, जिन लोगों की अनामिका उंगली के ठीक नीचे चक्र का निशान बनता है, वो अक्सर परेशान रहते हैं। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, ऐसे लोगों को हर काम में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। साथ ही ये अपनी लव लाइफ से संतुष्ट नहीं रहते हैं। इन्हें जीवनसाथी का वो प्यार नहीं मिल पाता है, जिसकी इन्हें चाह होती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख हस्तरेखा शास्त्र से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। भक्ति टाइम्स इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।
