Samudrik Shastra: वैदिक ज्योतिष शास्त्र की तरह सामुद्रिक शास्त्र भी एक प्राचीन विद्या है, जिसका हिन्दू धर्म के लोगों के लिए खास महत्व है। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की स्थिति के आधार पर व्यक्ति के भविष्य का आकलन किया जाता है, जबकि सामुद्रिक शास्त्र में शरीर की बनावट, निशान और चिह्नों के जरिए व्यक्ति के बारे में जाना जाता है। हस्तरेखा शास्त्र भी सामुद्रिक शास्त्र का एक हिस्सा है, जिसमें हाथ की रेखाओं और पर्वतों से व्यक्ति के जीवन से जुड़े विभिन्न रहस्यों को खोलने का प्रयास किया जाता है।
आज यहां पर आप हथेली पर मौजूद रेखाओं, तिल और आकार आदि से मिलने वाले शुभ-अशुभ संकेतों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
दाहिने हाथ की हथेली पर तिल होना कैसा होता है?
सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार, दाहिने हाथ की हथेली पर तिल होना अच्छा होता है। ऐसा व्यक्ति मेहनती, समझदार और शांत स्वभाव वाला होता है। इन लोगों को रिश्तों की भी कदर होती है, जिन्हें जोड़े रखने के लिए ये प्रयास करते हैं। इसके अलावा इनका बीमारियों में पैसा भी कम खर्च होता है।
बाएं हाथ की हथेली पर तिल होना कैसा होता है?
जिन लोगों के बाएं हाथ की हथेली पर तिल होता है, वो कमाने से ज्यादा खर्च करने पर ध्यान देते हैं। इन्हें कल की चिंता नहीं होती है, बल्कि ये आज का मजा लेते हैं। इन लोगों का स्वभाव ज्यादा मिलनसार नहीं होता है। ये जरूरत पड़ने पर ही किसी से दोस्ती करते हैं। इसी वजह से मुश्किल समय में ये अकेले रह जाते हैं।
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हथेली पर कैसी रेखाओं का होना शुभ माना जाता है?
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, हथेली पर गहरी, स्पष्ट, बिना कटी और सीधी रेखाओं का होना शुभ होता है। खासकर, जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा और हृदय रेखा का स्पष्ट दिखाई देना अच्छे स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और सकारात्मकता का संकेत माना जाता है। ऐसे लोग अपनी मेहनत से जीवन में कामयाबी हासिल करने का दम रखते हैं।
किस तरह की हथेली का होना है शुभ?
जिन लोगों की हथेली न तो अत्यधिक मुलायम और न ही बहुत ज्यादा सख्त यानी लचीली व सामान्य होती है वो काफी भाग्यशाली होते हैं। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, ऐसे लोगों को कम समय में बड़ी सफलता मिल जाती है। ये लोग काफी समझदार होते हैं, जो अपने साथी को खुश रखने के लिए तमाम प्रयास करते हैं। इसके अलावा अपनी सेहत को लेकर भी ये काफी सजग होते हैं। ऐसे में ये बीमार भी कम पड़ते हैं।
