Bach Baras Ki Aarti: बछ बारस का पर्व मां और संतान के पवित्र प्रेम को समर्पित माना जाता है। इसे गोवंश द्वादशी और बच्छ बारस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, बछ बारस पर गाय और उसके बछड़े की पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
बछ बारस की पूजा में गौ माता को स्नान कराकर रोली, अक्षत, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद विधि-विधान से पूजा कर गौ माता की आरती की जाती है। यह पूजा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि गाय के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने का माध्यम भी है। भारतीय संस्कृति में गाय को ममता, पालन-पोषण और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। आगे बछ बारस (Bach Baras 2026) के पावन पर्व पर पढ़ें गौ माता की आरती के लिरिक्स...
गौ माता की आरती (Gau Mata Ki Aarti Lyrics In Hindi)
ॐ जय जय गौमाता, मैया जय जय गौमाता।
जो कोई तुमको ध्याता, त्रिभुवन सुख पाता॥
सुख समृद्धि प्रदायनी, गौ की कृपा मिले।
जो करे गौ की सेवा, पल में विपत्ति टले॥
आयु ओज विकासिनी, जन जन की माई।
शत्रु मित्र सुत जाने, सब की सुख दाई॥
सुर सौभाग्य विधायिनी, अमृती दुग्ध दियो।
अखिल विश्व नर नारी, शिव अभिषेक कियो॥
ममतामयी मन भाविनी, तुम ही जग माता।
जग की पालनहारी, कामधेनु माता॥
संकट रोग विनाशिनी, सुर महिमा गाई।
गौ शाला की सेवा, संतन मन भाई॥
गौ मां की रक्षा हित, हरी अवतार लियो।
गौ पालक गौपाला, शुभ संदेश दियो॥
श्री गौमाता की आरती, जो कोई सुत गावे।
पदम् कहत वे तरणी, भव से तर जावे॥
ॐ जय जय गौमाता, मैया जय जय गौमाता॥
बछ बारस की पूजा विधि
बछ बारस के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद गाय और बछड़े को स्नान कराकर उनके माथे पर रोली या हल्दी का तिलक लगाएं। गाय को फूलों की माला पहनाएं और गुड़, हरा चारा आदि अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर गौ माता और बछड़े की विधि-विधान से पूजा करें। पूजा के दौरान बछ बारस की कथा पढ़ें और अंत में गौ माता की आरती करें। मान्यता के अनुसार, इस दिन गाय-बछड़े की परिक्रमा और श्रद्धापूर्वक सेवा करना भी शुभ माना जाता है।
बछ बारस का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं में गाय को माता के समान पूजनीय माना गया है। बछ बारस का पर्व मातृत्व, ममता और संतान के प्रति प्रेम का प्रतीक है। महिलाएं संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं। गाय और बछड़े की पूजा के माध्यम से प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति कृतज्ञता का भाव भी व्यक्त किया जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से गौ पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि और मंगल बना रहता है।
