Vastu Tips: घर की सजावट में हम अक्सर रंग, फर्नीचर, रोशनी और दिशा पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन चीजों की ऊंचाई को नजरअंदाज कर देते हैं। दीवार पर लगी तस्वीर हो, पूजा की वस्तु, घड़ी, आईना या रोजमर्रा की कोई जरूरी चीज- उसे किस ऊंचाई पर रखा गया है, इसका असर कमरे के लुक और इस्तेमाल की सुविधा दोनों पर पड़ता है। वास्तु के नजरिए से भी घर में वस्तुओं की स्थिति और उनका संतुलन महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी से जुड़ी एक दिलचस्प अवधारणा है Eye-Level Placement, यानी चीजों को आंखों के स्तर के आसपास व्यवस्थित करना। आइए वास्तु के हिसाब से समझते हैं इसका महत्व...
आंखों के स्तर पर चीजें रखने का अर्थ
Eye-Level Placement का सीधा अर्थ है ऐसी वस्तुओं को इस ऊंचाई पर रखना, जहां खड़े व्यक्ति की नजर स्वाभाविक रूप से पहुंच सके। इसका उद्देश्य घर को ऐसा व्यवस्थित करना है कि जरूरी चीजें देखने और इस्तेमाल करने में सहज हों। वास्तु की दृष्टि से घर में अनावश्यक ऊंच-नीच, अव्यवस्था और भारीपन से बचना सकारात्मक वातावरण बनाने में सहायक माना जाता है। इसलिए वस्तुओं को कमरे के आकार, दीवार की ऊंचाई और उनके उपयोग के अनुसार संतुलित तरीके से रखना बेहतर माना जाता है।
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दीवार की तस्वीर और सजावटी वस्तुएं
घर में तस्वीरें, पेंटिंग या सजावटी फ्रेम लगाते समय बहुत ज्यादा ऊपर या नीचे की स्थिति कमरे का संतुलन बिगाड़ सकती है। सामान्य तौर पर तस्वीर का मुख्य हिस्सा आंखों के स्तर के आसपास रखना ज्यादा सहज दिखाई देता है। अगर घर में देवी-देवताओं, प्रकृति या सकारात्मक संदेशों वाली तस्वीरें लगाई जा रही हैं, तो उन्हें सम्मानजनक और साफ-सुथरी जगह पर रखना चाहिए। इन्हें दरवाजे के पीछे, बेहद नीचे या ऐसी जगह लगाने से बचें जहां लगातार धूल-मिट्टी जमा होती हो।
आईना लगाते समय ऊंचाई का रखें ध्यान
आईना ऐसी चीज है जिसे घर में रोज देखा जाता है। इसलिए इसे बहुत ऊंचा या बहुत नीचे लगाने के बजाय ऐसी ऊंचाई पर रखना उपयोगी है जहां परिवार के अधिकांश सदस्य सहजता से अपना प्रतिबिंब देख सकें। वास्तु में आईने की दिशा और स्थान को लेकर भी कई मान्यताएं हैं। हालांकि केवल ऊंचाई को शुभ-अशुभ का एकमात्र आधार नहीं माना जाना चाहिए। कमरे का उपयोग, प्रकाश और सुविधा भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
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पूजा की चीजों में संतुलन
पूजा स्थल घर का संवेदनशील और महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यहां रखी मूर्तियों और तस्वीरों को सामान्य सजावटी वस्तुओं की तरह रखने के बजाय सम्मानपूर्वक व्यवस्थित करना चाहिए। पूजा करते समय बैठने या खड़े होने की स्थिति के अनुसार देव प्रतिमाएं ऐसी ऊंचाई पर हों कि उन पर आसानी से नजर जा सके। बहुत ऊंचाई पर रखी मूर्तियां रोजाना पूजा और सफाई में असुविधा पैदा कर सकती हैं।
ऊंची चीजों से समस्या
घर की हर चीज को आंखों के बिल्कुल सामने रखना जरूरी नहीं है। लेकिन अगर दीवारों के ऊपरी हिस्से में बहुत ज्यादा भारी सजावट, बड़े बॉक्स या अनुपयोगी सामान जमा हो जाएं, तो कमरा भरा-भरा दिखाई दे सकता है। इसलिए आंखों के स्तर के आसपास जरूरी और आकर्षक वस्तुओं को प्राथमिकता दें, जबकि कम इस्तेमाल होने वाले सामान को व्यवस्थित स्टोरेज में रखें।
वास्तु में जरूरी है संतुलन
Eye-Level Placement को वास्तु का कोई स्वतंत्र और निश्चित नियम मानने के बजाय घर में संतुलन, सुविधा और सकारात्मक दृश्य व्यवस्था के सिद्धांत के रूप में समझना बेहतर है। वस्तु किस दिशा में है, उसका उपयोग क्या है, कमरे की संरचना कैसी है और वहां रहने वालों की जरूरत क्या है- इन सभी बातों को साथ देखकर निर्णय लेना चाहिए।
आखिरकार, सुंदर घर वही है जहां चीजें सिर्फ देखने में अच्छी न लगें, बल्कि उन्हें इस्तेमाल करना भी आसान हो। आंखों के स्तर पर सही वस्तु और सही ऊंचाई का चुनाव इसी संतुलन को बेहतर बनाने का एक सरल तरीका हो सकता है।
