दिवाली के पावन पर्व पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की नई प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा सदियों पुरानी है। धनतेरस और दिवाली के अवसर पर भक्त श्रद्धापूर्वक अपने घरों में देवी-देवताओं का आगमन करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से की गई पूजा घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता लेकर आती है। हालांकि, वास्तु शास्त्र के जानकारों का मानना है कि घर में स्थापित होने वाली मूर्तियों का चयन यदि वास्तु के अनुरूप हो, तो इसके शुभ परिणाम अधिक मिलते हैं।
वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, बाजार से मूर्ति खरीदते समय कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना आवश्यक है ताकि घर में किसी प्रकार का वास्तु दोष उत्पन्न न हो। मूर्ति का चयन करते समय उसकी मुद्रा, रंग और आकार को प्राथमिकता देना चाहिए। आइए जानते हैं कि शास्त्र और वास्तु के अनुसार कैसी प्रतिमा घर लाना शुभ माना गया है।
मूर्ति की मुद्रा और स्वरूप का चयन
वास्तु शास्त्र के अनुसार, माता लक्ष्मी की ऐसी प्रतिमा का चुनाव करना चाहिए जिसमें वे कमल के फूल पर विराजमान हों। बैठी हुई मुद्रा वाली लक्ष्मी जी को स्थिरता का प्रतीक माना जाता है, जबकि खड़ी हुई मुद्रा चंचलता लाती है, जिससे घर में धन का ठहराव मुश्किल हो सकता है। इसके साथ ही, 'धन वर्षा' मुद्रा वाली प्रतिमा, जिसमें माता के हाथों से धन गिरता हुआ दिखाई दे, उसे अत्यंत शुभ माना गया है।भगवान गणेश की प्रतिमा के संबंध में वास्तु गुरु बताती हैं कि उनकी सूंड हमेशा बाईं ओर मुड़ी होनी चाहिए। ऐसी प्रतिमा को 'वाममुखी' गणेश कहा जाता है, जो गृहस्थ जीवन के लिए अत्यंत मंगलकारी मानी जाती है। इसके अलावा, यह सुनिश्चित करें कि गणेश जी के साथ उनका वाहन मूषक और माता लक्ष्मी के साथ उनका वाहन उल्लू या एरावत हाथी अवश्य हो।
रंग, आकार और अन्य सावधानियां
मूर्ति के रंगों का चयन करते समय गुलाबी, सुनहरा या हल्का पीला रंग सबसे उत्तम माना गया है। ध्यान रखें कि माता लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति काले या गहरे रंगों की न हो। यदि प्रतिमा ने लाल, गुलाबी या पीले रंग के वस्त्र धारण किए हों, तो यह घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।आकार के विषय में स्पष्ट निर्देश हैं कि घर के मंदिर के लिए मूर्ति 1 से 9 इंच के बीच ही होनी चाहिए। इससे बड़ी मूर्तियों के लिए प्राण-प्रतिष्ठा के नियम अत्यंत जटिल होते हैं, जिनका पालन सामान्य घरों में करना कठिन होता है। मूर्ति खरीदते समय यह भी ध्यान रखें कि प्रतिमा कहीं से भी खंडित या चटकी हुई न हो, क्योंकि एक छोटा सा स्क्रैच भी वास्तु दोष का कारण बन सकता है। साथ ही, लक्ष्मी और गणेश की ऐसी मूर्तियां न खरीदें जो आपस में जुड़ी हुई हों; हमेशा अलग-अलग प्रतिमाएं ही स्थापित करनी चाहिए।
